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“लोन नहीं लिया फिर भी बन गए कर्जदार!” गालियां, धमकियां और बदनामी… देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराध

Fake Loan Apps India: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन ने जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ कई नए खतरे भी पैदा हो गए हैं. इन्हीं खतरों में सबसे तेजी से बढ़ता अपराध है- फर्जी लोन ऐप फ्रॉड. आर्थिक तंगी, अचानक आई बीमारी, नौकरी छूटना, बच्चों की फीस या घर के जरूरी खर्च जैसी परिस्थितियों में लोग जल्दी पैसे की तलाश में ऑनलाइन लोन ऐप्स का सहारा लेते हैं.

देश में सरकारी बैंकों और प्रतिष्ठित प्राइवेट बैंकों के अलावा सैकड़ों NBFC (नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां), माइक्रो फाइनेंस संस्थाएं और मोबाइल एप्लीकेशन लोन देने का काम कर रही हैं. इनमें से कुछ कंपनियां RBI के नियमों के तहत काम करती हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे फर्जी ऐप्स भी मौजूद हैं जो बिना किसी कानूनी अनुमति के लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं.

ऐप डाउनलोड करते ही शुरू हो जाता है खतरा
अधिकतर लोग यह समझ ही नहीं पाते कि जैसे ही वे किसी संदिग्ध लोन ऐप को डाउनलोड करके इंस्टॉल करते हैं, उसी समय उनका निजी डेटा खतरे में पड़ जाता है. ये ऐप्स मोबाइल में मौजूद कांटेक्ट लिस्ट, फोटो गैलरी, कॉल लॉग, मैसेज और कई बार लोकेशन तक का एक्सेस मांगते हैं. लोग जल्दी में बिना पढ़े “Allow” पर क्लिक कर देते हैं और यहीं से शुरू होता है ब्लैकमेलिंग का खतरनाक खेल.

ऐप्स यूजर से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट, ईमेल और अन्य निजी जानकारी भरवाते हैं. कई बार व्यक्ति सिर्फ यह चेक कर रहा होता है कि उसे कितना लोन मिल सकता है, लेकिन कंपनी उसके डेटा को अपने सर्वर में सेव कर लेती है.

बिना अनुमति खाते में पैसा डालने का खेल
फर्जी लोन कंपनियों की सबसे खतरनाक चाल यह है कि वे कई बार बिना अंतिम अनुमति के ही किसी व्यक्ति के खाते में थोड़ी रकम ट्रांसफर कर देती हैं. इसके बाद शुरू होता है वसूली और मानसिक उत्पीड़न का सिलसिला.

कुछ हजार रुपये डालकर उस पर 400 से 500 प्रतिशत तक ब्याज जोड़ दिया जाता है. जब व्यक्ति विरोध करता है और कहता है कि उसने लोन की मंजूरी ही नहीं दी, तब कंपनियां कोई कानूनी दस्तावेज या ट्रांजैक्शन डिटेल देने की बजाय गाली-गलौज और धमकी का सहारा लेती हैं.

पीड़ित जब यह कहता है कि आप जिस खाते से पैसा भेजे हैं उसकी जानकारी दीजिए, मैं रकम लौटा देता हूं, तब भी कंपनियां स्पष्ट जानकारी नहीं देतीं. उनका मकसद समाधान नहीं, बल्कि डर पैदा करना होता है.

रिश्तेदारों को कॉल कर किया जाता है अपमानित
इन फर्जी कंपनियों का सबसे शर्मनाक तरीका होता है- पीड़ित व्यक्ति के रिश्तेदारों और दोस्तों को फोन करना. क्योंकि ऐप पहले ही मोबाइल की कांटेक्ट लिस्ट चुरा चुका होता है, इसलिए ये लोग “मां”, “पापा”, “भाई”, “चाचा”, “मामा”, “ऑफिस”, “सर” जैसे नामों से सेव नंबरों को पहचान लेते हैं. इसके बाद उन सभी को फोन करके कहा जाता है कि आपका रिश्तेदार लोन लेकर भाग गया है.

कई मामलों में गाली-गलौज, धमकी और चरित्र हनन तक किया जाता है. पीड़ित व्यक्ति को इतना मानसिक रूप से परेशान कर दिया जाता है कि वह समाज में बदनामी के डर से पैसा देने को मजबूर हो जाए.

बिना लोन लिए भी बन सकते हैं फ्रॉड के शिकार
कई बार देखा गया है कि व्यक्ति ने जीवन में कभी कोई कर्ज नहीं लिया होता, फिर भी उसका डेटा किसी अविश्वसनीय ऐप या वेबसाइट के जरिए चोरी हो जाता है. साइबर अपराधी उस डेटा का इस्तेमाल करके नकली लोन केस बनाते हैं और बाद में ब्लैकमेल का खेल शुरू कर देते हैं. इसलिए जरूरत है कि पीड़ित व्यक्ति को शर्मिंदा करने की बजाय उसका साथ दिया जाए और उसे कानूनी मदद लेने के लिए प्रेरित किया जाए.

गोपनीयता का उल्लंघन बड़ा साइबर अपराध
नियम स्पष्ट हैं कि यदि किसी व्यक्ति ने वास्तव में किसी कंपनी से लोन लिया है और किसी गंभीर आर्थिक परिस्थिति के कारण वह समय पर भुगतान करने में असमर्थ है, तो कंपनी को केवल कानूनी प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है. किसी भी स्थिति में उस व्यक्ति के रिश्तेदारों, दोस्तों या परिचितों को कॉल करके उसकी निजता और गोपनीयता का उल्लंघन करने, मानसिक दबाव बनाने या बदनाम करने का अधिकार नहीं है.

फोटो एडिट कर बदनाम करने तक पहुंच जाता है मामला
बीते कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां फर्जी रिकवरी एजेंटों ने लोगों की फोटो गैलरी से तस्वीरें निकालकर उन्हें अश्लील तरीके से एडिट किया और फिर कांटेक्ट लिस्ट में मौजूद लोगों को भेज दिया.

यह सिर्फ ऑनलाइन फ्रॉड नहीं, बल्कि साइबर आतंक का रूप ले चुका है. महिलाओं के मामलों में यह उत्पीड़न और भी गंभीर हो जाता है. कई पीड़ित मानसिक तनाव में चले जाते हैं और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं.

प्रतिष्ठित कंपनियां ऐसा व्यवहार नहीं करतीं
यह समझना बेहद जरूरी है कि RBI से रजिस्टर्ड और प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थाएं कभी भी ग्राहक के साथ गाली-गलौज या धमकी जैसा व्यवहार नहीं करतीं. वे तय नियमों और रिकवरी गाइडलाइंस का पालन करती हैं.

यदि कोई कंपनी आपके रिश्तेदारों को कॉल कर रही है, सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी दे रही है या अश्लील तस्वीरें भेजने की बात कर रही है, तो समझ जाइए कि मामला अवैध और आपराधिक है.

कैसे बचें ऐसे डिजिटल जाल से?
केवल विश्वसनीय और RBI-रजिस्टर्ड ऐप्स से ही लोन लें.
किसी भी ऐप को कांटेक्ट, गैलरी और कॉल लॉग का अनावश्यक एक्सेस न दें.
अनजान या कम रेटिंग वाले ऐप डाउनलोड करने से बचें.
किसी भी दस्तावेज को बिना पढ़े स्वीकार न करें.
मोबाइल में मजबूत सिक्योरिटी और एंटीवायरस का इस्तेमाल करें.
संदिग्ध कॉल्स और धमकियों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखें.

पीड़ित अकेला नहीं है, साथ खड़े होने की जरूरत
समाज में अक्सर देखा जाता है कि जब किसी व्यक्ति के बारे में इस तरह के कॉल रिश्तेदारों या दोस्तों के पास आते हैं तो लोग उसका मजाक उड़ाने लगते हैं. लेकिन सच यह है कि अगला शिकार कोई भी हो सकता है.

शिकायत कहां करें?
साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करनी चाहिए.
स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए.
RBI बैंकिंग लोकपाल में शिकायत करनी चाहिए.
सभी कॉल रिकॉर्डिंग व स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखने चाहिए.

डिजिटल इंडिया के इस दौर में तकनीक वरदान भी है और खतरा भी. जागरूकता, सतर्कता और कानूनी कार्रवाई ही ऐसे साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है.

यह भी पढ़ें- लोन हुआ रिजेक्ट? जानिए दोबारा अप्लाई करने का सही समय, वरना फिर लगेगा झटका

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