HomeनेशनलCBSE OSM विवाद पर मचा सियासी तूफान, एक्शन मोड में सरकार

CBSE OSM विवाद पर मचा सियासी तूफान, एक्शन मोड में सरकार

CBSE OSM Controversy 2026: सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) को लेकर देशभर में उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार के स्तर पर हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर हुई एक अहम बैठक के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि सरकार अब इस पूरे मामले में बड़े प्रशासनिक और तकनीकी कदम उठा सकती है. शिक्षा मंत्रालय, CBSE और संबंधित एजेंसियों के बीच लगातार मंथन जारी है. छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है.

OSM सिस्टम पर क्यों मचा बवाल?
इस साल CBSE ने कक्षा 12 की कॉपियों के मूल्यांकन में बड़े स्तर पर On-Screen Marking (OSM) प्रणाली का इस्तेमाल किया. दावा किया गया था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज और अधिक पारदर्शी होगी, लेकिन परिणाम आने के बाद कई छात्रों ने गंभीर गड़बड़ियों के आरोप लगाए.

कई छात्रों का कहना है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाएं किसी और की अपलोड हो गईं, कुछ ने अंक कम मिलने की शिकायत की, जबकि कुछ अभिभावकों ने कॉपी स्कैनिंग और मार्किंग में तकनीकी त्रुटियों का आरोप लगाया. एक दिल्ली के छात्र की शिकायत सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और गर्मा गया. बाद में CBSE ने उस मामले में गलती स्वीकार करते हुए सही उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराई.

राजनाथ सिंह के घर पर बैठक से बढ़ी सियासी सरगर्मी
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं और सरकार से जुड़े प्रमुख लोगों के बीच बैठक हुई. हालांकि आधिकारिक तौर पर बैठक का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि CBSE OSM विवाद और उससे बने माहौल पर भी चर्चा हुई.

सरकार इस बात को लेकर चिंतित बताई जा रही है कि छात्रों और अभिभावकों में बढ़ता असंतोष आगामी दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है. ऐसे में जवाबदेही तय करने, तकनीकी ऑडिट कराने और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की जांच जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है.

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वीकार की जिम्मेदारी
विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को सार्वजनिक रूप से कहा कि OSM प्रक्रिया में सामने आई समस्याओं की जिम्मेदारी सरकार और मंत्रालय स्वीकार करता है. उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की जानबूझकर लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

प्रधान ने कहा कि छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है और किसी भी कीमत पर उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. मंत्रालय ने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सुधारात्मक कदम शुरू करने की बात भी कही है.

राहुल गांधी और कांग्रेस ने सरकार को घेरा
इस पूरे विवाद को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि OSM कॉन्ट्रैक्ट देने में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं और परिणामों में “मैनिपुलेशन” की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने संबंधित कंपनी के पुराने रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए.

वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त तैयारी और पायलट प्रोजेक्ट के पूरे देश में OSM लागू कर दिया गया. विपक्ष का दावा है कि लाखों छात्रों को इसकी कीमत चुकानी पड़ी.

CBSE ने आरोपों को बताया भ्रामक
CBSE ने विपक्ष और सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोपों को “भ्रामक और गलत” बताया है. बोर्ड का कहना है कि OSM कोई नई प्रणाली नहीं है और इसे पहले भी सीमित स्तर पर इस्तेमाल किया जा चुका है. CBSE ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित “हैकिंग” वाली खबरें गलत हैं और वायरल हुआ पोर्टल केवल टेस्टिंग प्लेटफॉर्म था.

बोर्ड के अनुसार, मूल्यांकन प्रक्रिया में सुरक्षा के कई स्तर रखे गए थे और किसी भी छात्र के वास्तविक डेटा से छेड़छाड़ नहीं हुई. हालांकि, बोर्ड ने यह माना कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग में दिक्कतें आई थीं.

संसद की समिति भी करेगी समीक्षा
मामला अब संसद तक पहुंच गया है. राज्यसभा की संसदीय स्थायी समिति ने 2 जून को शिक्षा मंत्रालय और CBSE अधिकारियों को तलब किया है. बैठक में OSM प्रणाली और छात्रों को हुई परेशानियों की समीक्षा की जाएगी.

सूत्रों का कहना है कि समिति मूल्यांकन प्रक्रिया, तकनीकी तैयारी, कॉपी स्कैनिंग, डेटा सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र पर विस्तृत रिपोर्ट मांग सकती है. इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
देशभर में कई छात्र अब पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन प्रक्रिया का सहारा ले रहे हैं. सोशल मीडिया पर #CBSE_OSM और #JusticeForStudents जैसे हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहे हैं. कई शिक्षकों ने भी दावा किया है कि नई डिजिटल प्रणाली को पर्याप्त प्रशिक्षण और परीक्षण के बिना लागू किया गया. विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन भविष्य की जरूरत है, लेकिन इसे लागू करने से पहले मजबूत तकनीकी ढ़ांचा और व्यापक परीक्षण जरूरी था.

आगे क्या हो सकता है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में OSM प्रक्रिया का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जा सकता है. कुछ अधिकारियों की जवाबदेही तय होने की भी संभावना जताई जा रही है. इसके अलावा, CBSE भविष्य में OSM प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने या उसमें बड़े बदलाव करने पर भी विचार कर सकता है.

फिलहाल देशभर के लाखों छात्र इस इंतजार में हैं कि सरकार और CBSE इस विवाद का अंतिम समाधान कैसे निकालते हैं. आने वाले कुछ दिन इस पूरे मामले में बेहद अहम माने जा रहे हैं.

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