Rules for Alcohol in Trains: भारतीय रेलवे में हर दिन करोड़ों लोग सफर करते हैं. छुट्टियों, त्योहारों और पर्यटन सीजन में बड़ी संख्या में यात्री एक राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं. ऐसे में, कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या ट्रेन में शराब की बोतल ले जाना कानूनी है? क्या सीलबंद शराब लेकर यात्रा की जा सकती है? और अगर रेलवे या आरपीएफ जांच में शराब मिल जाए तो क्या जुर्माना या कार्रवाई हो सकती है?
31 मई 2026 तक उपलब्ध रेलवे नियमों, कानूनी प्रावधानों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इस विषय को लेकर काफी भ्रम बना हुआ है. वजह यह है कि रेलवे नियम, राज्य आबकारी कानून (Excise Laws) और सुरक्षा नियम कई मामलों में एक साथ लागू होते हैं.
क्या ट्रेन में शराब ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है?
इस सवाल का सीधा “हां” या “नहीं” में जवाब देना आसान नहीं है. रेलवे अधिनियम 1989 में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो हर स्थिति में सीलबंद शराब की बोतल रखने को सीधे अपराध घोषित करता हो. लेकिन रेलवे अधिकारियों को यात्रियों के सामान की जांच करने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करने का अधिकार है.
कुछ रेलवे अधिकारियों ने मीडिया को बताया है कि ट्रेनों में शराब ले जाना अनुमति प्राप्त गतिविधि नहीं माना जाता और सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति में कार्रवाई की जा सकती है. यही कारण है कि यात्रियों को शराब लेकर यात्रा करने से पहले अपने रूट और संबंधित राज्यों के कानूनों की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए.
सबसे बड़ा नियम: किस राज्य से गुजर रही है आपकी ट्रेन?
कई मामलों में असली कानूनी जोखिम रेलवे नियमों से ज्यादा राज्य के शराब कानूनों से जुड़ा होता है. उदाहरण के लिए यदि आपकी ट्रेन ऐसे राज्यों से गुजरती है जहां शराबबंदी लागू है, जैसे बिहार, गुजरात, नागालैंड या लक्षद्वीप, तो वहां शराब रखना या ले जाना गंभीर कानूनी मामला बन सकता है. भले ही शराब किसी दूसरे राज्य से कानूनी रूप से खरीदी गई हो, लेकिन प्रतिबंधित राज्य में प्रवेश करने पर वही बोतल कानून के दायरे में आ सकती है. इसी वजह से कई विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि यात्रा का रूट किसी ड्राई स्टेट से गुजर रहा हो तो शराब बिल्कुल न ले जाएं.
क्या ट्रेन में शराब पीना कानूनी है?
इस मामले में नियम काफी स्पष्ट हैं. भारतीय रेलवे के अनुसार ट्रेन, प्लेटफॉर्म और रेलवे परिसर सार्वजनिक स्थान माने जाते हैं. ट्रेन के अंदर शराब पीना, नशे की हालत में हंगामा करना या अन्य यात्रियों को परेशानी पहुंचाना रेलवे अधिनियम के तहत दंडनीय हो सकता है.
रेलवे अधिनियम की धारा 145 के तहत नशे की हालत में अव्यवस्था फैलाने, अभद्र व्यवहार करने या दूसरों को असुविधा पहुंचाने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान हो सकता है.
हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी एक मामले में टिप्पणी करते हुए शराब के प्रभाव में हुई घटना को गंभीर माना और रेलवे अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख किया.
कितनी शराब ले जा सकते हैं?
यहीं सबसे ज्यादा भ्रम देखने को मिलता है. कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि व्यक्तिगत उपयोग के लिए सीमित मात्रा में सीलबंद शराब ले जाना कई राज्यों में स्वीकार किया जाता है और सामान्यतः दो लीटर तक की सीमा का उल्लेख किया जाता है.
लेकिन भारतीय रेलवे की ओर से पूरे देश के लिए ऐसा कोई सार्वभौमिक सार्वजनिक नियम जारी नहीं किया गया है जो स्पष्ट रूप से कहे कि हर यात्री ट्रेन में निश्चित मात्रा में शराब ले जा सकता है. कई मामलों में राज्य आबकारी कानून अलग-अलग होते हैं. इसलिए केवल “दो बोतल ले जाना हमेशा कानूनी है” जैसी सोशल मीडिया सलाह पर भरोसा करना सही नहीं माना जाता.
जांच के दौरान क्या हो सकता है?
रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और राज्य आबकारी विभाग समय-समय पर जांच अभियान चलाते हैं. यदि जांच के दौरान शराब बरामद होती है तो कार्रवाई परिस्थितियों पर निर्भर करती है. यदि यात्रा प्रतिबंधित राज्य से गुजर रही हो या शराब की मात्रा संदिग्ध हो तो जब्ती, पूछताछ या कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
हाल ही में सोशल मीडिया और समाचार रिपोर्टों में ट्रेनों के जरिए शराब तस्करी के कई मामले सामने आए हैं. मई 2026 में बिहार के कटिहार क्षेत्र में ट्रेन के नीचे छिपाकर ले जाई जा रही बड़ी मात्रा में शराब पकड़े जाने का मामला भी चर्चा में रहा.
सोशल मीडिया की सलाह पर भरोसा करना खतरनाक
रेडिट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई यात्री दावा करते हैं कि उन्होंने शराब लेकर यात्रा की और कोई जांच नहीं हुई. वहीं कई लोगों ने यह भी बताया कि कुछ राज्यों में बैग की जांच हुई और शराब मिलने पर परेशानी का सामना करना पड़ा.
विशेषज्ञों का कहना है कि “कभी जांच नहीं होती” या “आराम से ले जाओ” जैसी सलाह कानूनी सुरक्षा की गारंटी नहीं होती. नियमों का उल्लंघन पकड़े जाने पर जिम्मेदारी पूरी तरह यात्री की होती है.
रेलवे की सलाह क्या है?
रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां यात्रियों को जिम्मेदार यात्रा की सलाह देती हैं. यदि यात्रा ऐसे क्षेत्र से हो रही है जहां शराबबंदी लागू है, तो शराब बिल्कुल न ले जाएं. यदि किसी राज्य में शराब कानूनी है, तब भी सार्वजनिक रूप से सेवन करने या नशे की हालत में यात्रा करने से बचना चाहिए. यात्रियों को अपने टिकट, पहचान पत्र और सामान से जुड़े सभी नियमों की तरह स्थानीय आबकारी कानूनों की भी जानकारी रखनी चाहिए.
सुरक्षित यात्रा के लिए नियमों का रखें ध्यान
31 मई 2026 तक उपलब्ध नियमों और रिपोर्टों के अनुसार, ट्रेन में शराब ले जाने को लेकर कोई एक लाइन वाला राष्ट्रीय नियम नहीं है. लेकिन इतना स्पष्ट है कि ट्रेन में शराब पीना, नशे में हंगामा करना या शराबबंदी वाले राज्यों में शराब ले जाना गंभीर कानूनी समस्या बन सकता है. रेलवे अधिकारियों को जांच और कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है. इसलिए यात्रा से पहले अपने रूट, राज्य कानून और रेलवे नियमों की जानकारी लेना ही सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम माना जा रहा है.
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