India Oman CEPA 2026: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संघर्षों के कारण दुनिया भर में ऊर्जा और उर्वरक (फर्टिलाइजर) आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं. भारत भी इससे अछूता नहीं है, क्योंकि देश अपनी गैस, कच्चे तेल और उर्वरकों की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे समय में भारत को एक महत्वपूर्ण राहत मिली है. खाड़ी क्षेत्र के मुस्लिम देश ओमान ने भारत के साथ अपने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करते हुए गैस, पेट्रोकेमिकल्स और उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की है.
1 जून 2026 से भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) लागू हो गया है. इस समझौते को केवल व्यापारिक करार नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक कवच के रूप में देखा जा रहा है.
भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत भारतीय निर्यात के 99 प्रतिशत हिस्से पर टैरिफ समाप्त कर दिए गए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है.
क्या है भारत-ओमान का नया करार?
भारत और ओमान के बीच लागू हुए CEPA के तहत दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स, खाद्य सुरक्षा, कृषि, ऊर्जा और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई है. इस समझौते के लागू होते ही हजारों उत्पादों पर शुल्क में राहत मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ओमान ने भारत को पेट्रोकेमिकल और उर्वरक आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि भारत अनुरोध करता है तो ओमान-इंडिया फर्टिलाइजर कंपनी (OMIFCO) में ओमान के हिस्से का उत्पादन भी भारत को उपलब्ध कराया जा सकता है.
खाद संकट से कैसे मिलेगी राहत?
ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण वैश्विक उर्वरक बाजार पहले से दबाव में है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि गैस आपूर्ति और समुद्री मार्गों में व्यवधान से यूरिया व अन्य उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है.
भारत की कृषि व्यवस्था बड़े पैमाने पर यूरिया पर निर्भर है. ऐसे में, ओमान से अतिरिक्त उर्वरक आपूर्ति की संभावना किसानों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है. OMIFCO पहले से ही भारत के लिए यूरिया उत्पादन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और दीर्घकालिक समझौतों के तहत उसका बड़ा हिस्सा भारत को मिलता रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तब भी ओमान के साथ बढ़ा सहयोग भारत को उर्वरक संकट से काफी हद तक बचा सकता है.
गैस और ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों अहम है ओमान?
भारत की सबसे बड़ी चिंता केवल खाद नहीं, बल्कि गैस और ऊर्जा आपूर्ति भी है. ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लगातार आशंकाएं बनी रहीं, क्योंकि दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है.
ओमान की विशेषता यह है कि उसके कई प्रमुख बंदरगाह अरब सागर की ओर स्थित हैं और वे होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं. इसी कारण विशेषज्ञ इसे भारत के लिए एक सुरक्षित वैकल्पिक ऊर्जा और व्यापारिक गलियारा मान रहे हैं. भारत सरकार और नीति विशेषज्ञों के अनुसार, ओमान के साथ यह साझेदारी भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक स्थिर बनाने में मदद कर सकती है.
व्यापार से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी
यह समझौता केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है. दोनों देश खाद्य सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा और औद्योगिक विकास जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. मई 2026 में हुई तकनीकी बैठकों में दोनों देशों ने कस्टम प्रक्रियाओं को आसान बनाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और निवेश अवसर बढ़ाने पर चर्चा की थी.
भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खाड़ी क्षेत्र में उसकी रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करता है और ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देता है.
किसानों और उद्योगों पर क्या होगा असर?
यदि ओमान से उर्वरकों और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की आपूर्ति बढ़ती है तो इसका सीधा लाभ कृषि क्षेत्र और कई उद्योगों को मिल सकता है. यूरिया की उपलब्धता बेहतर होने से खरीफ और रबी सीजन के दौरान किसानों को राहत मिलेगी. वहीं गैस और पेट्रोकेमिकल आपूर्ति मजबूत होने से रसायन, प्लास्टिक और विनिर्माण उद्योगों को भी फायदा हो सकता है.
हालांकि वैश्विक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं और पश्चिम एशिया का तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति जारी रखनी होगी.
भारत-ओमान CEPA से मजबूत होगी आर्थिक साझेदारी
ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत-ओमान CEPA का लागू होना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. ओमान द्वारा उर्वरक, पेट्रोकेमिकल और ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश ने भारत की खाद और गैस सुरक्षा को लेकर पैदा हुई चिंताओं को काफी हद तक कम किया है. आने वाले महीनों में यदि यह सहयोग जमीनी स्तर पर तेजी से आगे बढ़ता है, तो इसका फायदा किसानों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है.
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