Mango Buying Tips: गर्मी के मौसम में आम की मांग अपने चरम पर होती है, लेकिन इसके साथ ही बाजार में कृत्रिम रूप से पकाए गए आमों को लेकर चिंता भी बढ़ जाती है. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बार फिर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि आम, केला, पपीता समेत अन्य फलों को कैल्शियम कार्बाइड (Carbide या ‘मसाला’) से पकाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही मंडियों, गोदामों और फल भंडारण केंद्रों पर विशेष निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं. ऐसे में, उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कैसे पता लगाया जाए कि बाजार में मिलने वाला आम प्राकृतिक रूप से पका है या कार्बाइड से?
आखिर क्यों खतरनाक है कार्बाइड से पका आम?
कैल्शियम कार्बाइड नमी के संपर्क में आने पर एसीटिलीन गैस छोड़ता है, जिसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे हानिकारक तत्व हो सकते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इससे गले में जलन, उल्टी, चक्कर आना, त्वचा संबंधी समस्याएं और लंबे समय तक लगातार सेवन करने पर अन्य स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ सकते हैं. इसी कारण भारत में फलों को कार्बाइड से पकाना प्रतिबंधित है.
FSSAI ने क्या जारी किए हैं नए निर्देश?
अप्रैल 2026 में जारी ताजा एडवाइजरी में FSSAI ने स्पष्ट किया कि फलों को कार्बाइड से पकाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. इसके अलावा फलों को सीधे एथेफॉन (Ethephon) घोल में डुबोकर पकाने की प्रक्रिया को भी गलत बताया गया है. राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मंडियों, गोदामों और राइपनिंग चैंबरों में नियमित जांच करें व नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें.
ऐसे पहचानें प्राकृतिक और कार्बाइड से पके आम
कार्बाइड से पके आम की पहचान केवल रंग देखकर नहीं की जा सकती. कई लोग यही सबसे बड़ी गलती करते हैं. कुछ आसान संकेत आपकी मदद कर सकते हैं.
1. केवल चमकीले पीले रंग पर भरोसा न करें
यदि सभी आम एक जैसे चमकीले पीले और बिल्कुल एक समान दिख रहे हों तो सावधान हो जाइए. प्राकृतिक रूप से पके आमों में हल्का हरा, पीला और नारंगी रंग मिला-जुला दिखाई देता है.
2. खुशबू जरूर जांचें
प्राकृतिक रूप से पके आम में डंठल के पास मीठी और तेज प्राकृतिक खुशबू आती है. यदि आम देखने में पका हुआ लगे, लेकिन उसमें लगभग कोई सुगंध न हो, तो वह कृत्रिम रूप से पकाया गया हो सकता है.
3. गूदे पर दें ध्यान
आम काटने पर यदि ऊपर से पीला, लेकिन गुठली के पास गूदा कच्चा या सफेद दिखाई दे, तो यह असमान पकने का संकेत हो सकता है.
4. बहुत जल्दी पकने वाले आम से रहें सावधान
प्राकृतिक तरीके से आम को पकने में सामान्यतः 5 से 7 दिन लग सकते हैं, जबकि कार्बाइड से फल बहुत कम समय में पीले हो जाते हैं. इसलिए मौसम की शुरुआत में अत्यधिक पके हुए आम खरीदते समय सतर्क रहें.
5. पूरे ढ़ेर को देखें
यदि एक ही पेटी या टोकरी के सभी आम बिल्कुल समान आकार, समान रंग और समान स्तर तक पके हुए दिखें तो सावधानी बरतें. प्राकृतिक रूप से हर फल एक जैसा नहीं पकता.
अधिकतर लोग करते हैं ये गलती
कई लोग सोचते हैं कि जो आम पूरी तरह पीला है वही सबसे अच्छा और मीठा होगा. यही सबसे आम गलती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि प्राकृतिक रूप से पका आम अक्सर हल्के रंगों का मिश्रण लिए होता है. कई बार पूरी तरह पीला दिखने वाला आम अंदर से कच्चा निकल सकता है, जबकि थोड़ा हरा दिखाई देने वाला आम स्वाद में कहीं बेहतर हो सकता है.
क्या पानी में डालकर पहचानना सही तरीका है?
सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि आम को पानी में डालकर यह पता लगाया जा सकता है कि वह कार्बाइड से पका है या नहीं. लेकिन खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह तरीका वैज्ञानिक रूप से विश्वसनीय नहीं है. इसी तरह केवल रंग, वजन या पानी में तैरने-डूबने के आधार पर किसी आम को कार्बाइड से पका घोषित नहीं किया जा सकता.
क्या सभी कृत्रिम रूप से पके आम खतरनाक होते हैं?
सभी कृत्रिम रूप से पकाए गए फल असुरक्षित नहीं होते. FSSAI के अनुसार, एथिलीन गैस (Ethylene Gas) का नियंत्रित और निर्धारित मानकों के भीतर उपयोग सुरक्षित माना जाता है. एथिलीन स्वयं फलों में प्राकृतिक रूप से बनने वाला हार्मोन है, जो पकने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है. समस्या तब होती है जब प्रतिबंधित रसायनों जैसे- कैल्शियम कार्बाइड या अन्य गैर-अनुमोदित पदार्थों का उपयोग किया जाता है.
खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
केवल भरोसेमंद दुकानदार या अधिकृत विक्रेता से आम खरीदें.
कटे-फटे, अत्यधिक चमकीले या बिना खुशबू वाले आम लेने से बचें.
खरीदने के बाद आम को अच्छी तरह साफ पानी से धोकर ही खाएं.
यदि शक हो तो आम को 1-2 दिन कमरे के तापमान पर रखकर खाने से स्वाद और गुणवत्ता बेहतर हो सकती है.
छोटे किसानों या स्थानीय बागों से सीधे खरीदे गए मौसमी आम अक्सर अधिक प्राकृतिक होते हैं.
सरकार की निगरानी हुई और सख्त
2026 के आम सीजन में FSSAI ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि फल मंडियों, गोदामों और राइपनिंग चैंबरों में विशेष निरीक्षण अभियान चलाए जाएं. आवश्यकता पड़ने पर एसीटिलीन गैस की पहचान के लिए विशेष परीक्षण भी किए जा सकते हैं. यदि किसी व्यापारी के पास कार्बाइड या अन्य प्रतिबंधित राइपनिंग एजेंट पाए जाते हैं, तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
थोड़ी सावधानी, सुरक्षित और स्वादिष्ट आम की गारंटी
आम खरीदते समय केवल उसका रंग देखकर फैसला करना सही नहीं है. प्राकृतिक खुशबू, गूदे की गुणवत्ता, पकने की समानता और विश्वसनीय विक्रेता जैसे कई पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है. सरकार भी कार्बाइड से फल पकाने वालों पर लगातार सख्ती कर रही है, लेकिन सुरक्षित फल चुनने में उपभोक्ता की जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. थोड़ी सावधानी अपनाकर आप स्वादिष्ट और सुरक्षित आम का आनंद ले सकते हैं.
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