India Pakistan Tensions: पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत को एक बार फिर धमकी दी है. उनका कहना है कि अगर भारत ने पाकिस्तान के पानी के अधिकारों को चुनौती दी तो इसका “करारा जवाब” दिया जाएगा. सिंधु जल को उन्होंने पाकिस्तान की “रेड लाइन” तक बता दिया.
बयानबाजी में ऐसा आत्मविश्वास दिखा जैसे इस्लामाबाद ने कोई नई महाशक्ति खोज ली हो. मगर समस्या यह है कि याददाश्त शायद भाषणों की गर्मी में थोड़ी कमजोर हो गई है. ऑपरेशन सिंदूर को अभी बहुत समय नहीं बीता है, लेकिन पाकिस्तान की राजनीति में लगता है कि उसकी फाइल को “पुरानी खबर” वाले फोल्डर में डाल दिया गया है.
ऑपरेशन सिंदूर की मार भूल धमकी दे रहा पाकिस्तान
पहलगाम आतंकी हमले के बाद मई 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में आतंकी ढ़ांचे को निशाना बनाया था. भारत ने स्पष्ट किया था कि कार्रवाई का उद्देश्य आतंकवादी बुनियादी ढ़ांचे को निशाना बनाना था. भारतीय विदेश मंत्रालय की आधिकारिक ब्रीफिंग में भी ऑपरेशन के लक्ष्यों और भारत की कार्रवाई का विवरण दिया गया था.
अब अगस्त 2026 में पाकिस्तान की ओर से फिर वही पुराना सुर सुनाई दे रहा है- धमकी, “रेड लाइन”, जवाब और संप्रभुता. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार भाषण के मंच पर आतिशबाजी भी है और पीछे ऑपरेशन सिंदूर की यादों को शायद म्यूट बटन से दबाने की कोशिश भी.
पाकिस्तान में 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है. राजधानी इस्लामाबाद में जश्न और आतिशबाजी के बीच सरकार ने हालिया भारत-पाक संघर्ष को अपनी आधिकारिक कहानी के मुताबिक पेश किया.
पानी पर बयान, लेकिन सब्र की परीक्षा
सिंधु जल समझौते का मुद्दा अब दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है. शहबाज शरीफ ने पानी को लेकर भारत को चेतावनी दी है. दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान का राजनीतिक बयान जितना ऊंचा होता है, उतना ही सवाल उठता है कि क्या वह वास्तव में तनाव बढ़ाना चाहता है या घरेलू दर्शकों के लिए सख्त चेहरा दिखाना चाहता है. कूटनीति में माइक के सामने शेर बनना आसान है, असली परीक्षा फैसलों की होती है.
भारत की तरफ से फिलहाल पाकिस्तान की हर धमकी का जवाब धमकी से देना जरूरी नहीं दिखता. नई दिल्ली के लिए आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और अपने रणनीतिक हित प्राथमिक मुद्दे हैं. पाकिस्तान चाहे तो पुराने भाषणों की रिहर्सल जारी रख सकता है, लेकिन 2025 का अनुभव यह जरूर बताता है कि भारत की नीति को केवल बयानबाजी से पढ़ना जोखिम भरा है.
संदेश साफ है कि पाकिस्तान के पास स्वतंत्रता दिवस मनाने का पूरा अधिकार है, मगर इतिहास को अपनी सुविधा के मुताबिक एडिट करने से इतिहास बदलता नहीं. ऑपरेशन सिंदूर की फाइल बंद भले हो गई हो, उसकी याददाश्त अभी ऑनलाइन है.
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