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राम मंदिर दान चोरी केस: चंपत राय-अनिल मिश्रा पर उठे थे सवाल, SIT रिपोर्ट में नहीं बने आरोपी

Ram Temple Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ी कथित चोरी के मामले में 18 अगस्त 2026 को बड़ा अपडेट सामने आया है. विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के नाम आरोपी के तौर पर शामिल नहीं किए गए हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इसी आधार पर दोनों को SIT से क्लीन चिट मिलने की बात सामने आई है. हालांकि, इसे अंतिम न्यायिक क्लीन चिट मानना सही नहीं होगा, क्योंकि मामले से जुड़ी एक अन्य जांच और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही अभी जारी है.

अंतिम रिपोर्ट में सिर्फ आठ आरोपियों के नाम
SIT की अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है. रिपोर्ट में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आठ लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं. इनमें राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं. इन लोगों के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जा चुकी है.

चंपत राय और अनिल मिश्रा पर क्यों उठे थे सवाल?
मंदिर के चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और निगरानी को लेकर चंपत राय व अनिल मिश्रा पर गंभीर सवाल उठे थे. शुरुआती जांच में प्रशासनिक और निगरानी संबंधी खामियों का उल्लेख हुआ था. जांच के दौरान करीब 80 लाख रुपये की नकदी की बरामदगी का मामला भी सामने आया था, जिसे लेकर पुलिस को तत्काल सूचना नहीं दिए जाने पर सवाल उठे. विवाद बढ़ने के बाद दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिसे बाद में ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया.

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच जारी
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के नाम पहली SIT की अंतिम रिपोर्ट में आरोपी के रूप में नहीं होने के बावजूद पूरा विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले की जांच से जुड़ी SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया है. अदालत ने रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग स्वीकार नहीं की है.

इसलिए फिलहाल यह कहना ज्यादा सटीक होगा कि पहली SIT की अंतिम रिपोर्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाया गया है, जबकि मामले की न्यायिक निगरानी वाली जांच अभी जारी है. आगे की कार्रवाई और अदालत के निष्कर्ष से ही इस पूरे प्रकरण की अंतिम तस्वीर साफ होगी.

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