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‘रात में भी हर महिला सुरक्षित महसूस करे’, हाल की रेप घटनाओं पर SC सख्त, दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार

Supreme Court on Women Safety: दिल्ली-एनसीआर में हाल में सामने आए यौन अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को सख्त संदेश दिया है. 5 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि पुलिस का ध्यान केवल अपराध होने के बाद आरोपियों को पकड़ने पर नहीं, बल्कि अपराध को पहले ही रोकने पर होना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में हर महिला और लड़की को रात में भी सुरक्षित महसूस होना चाहिए.

रात 10-11 बजे भी महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस करें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे दिल्ली की हर महिला रात 10 बजे, 11 बजे या देर रात भी सड़क पर चलने, मेट्रो या अन्य सार्वजनिक परिवहन से सफर करने में खुद को सुरक्षित महसूस करे. अदालत ने माना कि राजधानी के कुछ संवेदनशील इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर डर की भावना बनी हुई है.

अपराध होने से पहले उसकी रोकथाम जरूरी
पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल कागजों पर सुरक्षा योजनाएं और व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं. पुलिस को जमीन पर सक्रिय होकर काम करना होगा. कोर्ट ने कहा कि संभावित अपराधियों के मन में कानून का ऐसा डर होना चाहिए कि वे यौन अपराध करने से पहले उसके गंभीर परिणामों के बारे में सोचें. साथ ही पुलिस को कानून के दायरे में सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटने की बात कही गई.

CCTV और पेट्रोलिंग पर भी उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि संवेदनशील स्थानों पर लगे CCTV कैमरे वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं और उनकी निगरानी लगातार किस तरह की जाती है. कोर्ट ने केवल कैमरे लगाने के बजाय उनकी निरंतर मॉनिटरिंग और जरूरत पड़ने पर तत्काल पुलिस प्रतिक्रिया पर जोर दिया. पार्कों, बस स्टैंड, रेलवे और मेट्रो स्टेशनों, स्कूल-कॉलेजों व अन्य संवेदनशील जगहों पर निगरानी और बीट पेट्रोलिंग मजबूत करने की बात कही गई.

यौन अपराधियों के डेटाबेस और ‘वॉर रूम’ पर जोर
अदालत ने National Database on Sexual Offenders (NDSO) के इस्तेमाल और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था पर भी सवाल किए. इससे पहले 28 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर के संवेदनशील इलाकों का सर्वे, CCTV और लाइटिंग ऑडिट व बेहतर पेट्रोलिंग के निर्देश दिए थे. अधिकारियों से यह भी पूछा गया था कि सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं जमीन पर वास्तव में कितनी प्रभावी हैं.

किन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में हाल में सामने आए कई गंभीर मामलों पर स्वतः संज्ञान लिया था. इनमें दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की से कथित गैंगरेप, स्वरूप नगर में एक किशोरी से जुड़े कथित गैंगरेप और हत्या व चलती स्लीपर बस में नाबालिग से कथित यौन हमले का मामला शामिल है. कोर्ट ने साफ किया है कि इन अलग-अलग मामलों में किसी आरोपी की दोषसिद्धि पर वह टिप्पणी नहीं कर रहा, बल्कि व्यवस्था की कमियों और अपराध रोकने के उपायों की समीक्षा कर रहा है.

यह भी पढ़ें- कालकाजी कांड के बाद बड़ा सवाल: मंदिर और पार्क के आसपास महिलाओं की सुरक्षा कितनी मजबूत?

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