Form 6 Controversy 2026: मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है. इसके बाद राहुल गांधी और कांग्रेस ने चुनाव आयोग व मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए. वहीं, भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 को गलत या अवैध नहीं बताया है.
क्या है फॉर्म-6?
फॉर्म-6 वह आवेदन है, जिसका इस्तेमाल कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए करता है. खासकर पहली बार वोटर बनने वाले लोगों के लिए यह फॉर्म महत्वपूर्ण है. विवाद उस समय शुरू हुआ जब Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान फॉर्म-6 के ऑनलाइन संस्करण के साथ एक अतिरिक्त घोषणा से जुड़ी जानकारी मांगी जाने लगी. इसमें आवेदक से पिछली SIR की मतदाता सूची में उसके या उसके परिवार से संबंधित जानकारी पूछी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने वास्तव में क्या कहा?
5 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. पीठ ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के किसी बदले हुए संस्करण को मंजूरी नहीं दी है. कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद वह देखना चाहता है कि अगर फॉर्म में बदलाव हुआ है तो किसने और किस तरीके से किया.
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. कोर्ट ने यह फैसला नहीं दिया कि फॉर्म-6 अवैध है. कोर्ट फिलहाल कथित बदलाव और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रहा है. इसलिए यह कहना कि “सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 को गलत या गैरकानूनी घोषित कर दिया” सही नहीं होगा.
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को भ्रामक बताया है. आयोग का कहना है कि मूल वैधानिक फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया और SIR के दौरान उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था. आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़ी यह व्यवस्था उस विशेष प्रक्रिया के संदर्भ में थी.
ECI ने 5 अक्टूबर को राहुल गांधी की पोस्ट का फैक्ट-चेक करते हुए कहा कि बिहार में SIR के लिए 24 जून 2025 को जारी आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी हुआ था और सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फैसले में उस आदेश को बरकरार रखा था. आयोग ने 26 सितंबर के अपने प्रेस नोट का भी हवाला दिया.
राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए?
राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में गैरकानूनी और एकतरफा तरीके से बदलाव किया. उन्होंने इसे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल बताते हुए CEC पर निशाना साधा.
हालांकि, यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है, सुप्रीम कोर्ट का निष्कर्ष नहीं. अदालत ने अभी यह तय नहीं किया है कि कथित बदलाव किसने किया और वह कानूनी रूप से वैध था या नहीं.
भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी से क्या पूछा?
भाजपा ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 को अवैध नहीं बताया है. भाजपा ने राहुल गांधी पर अदालत की टिप्पणी को अपने राजनीतिक दावे के समर्थन में पेश करने का आरोप लगाया और उनसे सवाल किया कि क्या वह कोर्ट की शुरुआती टिप्पणी को अंतिम फैसला मान रहे हैं.
भाजपा की ओर से यह भी कहा गया कि SIR और फॉर्म-6 को लेकर जनता के बीच भ्रम पैदा नहीं किया जाना चाहिए. पार्टी ने राहुल गांधी के दावों को लेकर उनसे यह स्पष्ट करने को कहा कि उनके पास कथित गैरकानूनी बदलाव के क्या प्रमाण हैं.
असली विवाद क्या है?
पूरे मामले को आसान भाषा में समझें तो विवाद फॉर्म-6 के मूल कानूनी प्रारूप और SIR के दौरान उससे जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उसने किसी संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी. चुनाव आयोग कह रहा है कि मूल फॉर्म-6 में बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR के लिए अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी. वहीं कांग्रेस इस प्रक्रिया और उसके अधिकार को लेकर सवाल उठा रही है.
इसलिए फिलहाल सबसे सटीक बात यही है कि फॉर्म-6 विवाद की सुप्रीम कोर्ट में जांच चल रही है. कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं सुनाया है कि फॉर्म-6 अवैध है या CEC ने गैरकानूनी तरीके से इसे बदला है.
यह भी पढ़ें- ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, पटना-चंडीगढ़ में वाटर कैनन से बौछार




