UP Expressway Speed Limit 2026: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए अहम खबर है. सर्दियों में कोहरे और सड़क हादसों के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है. ताजा मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यूपीडा के एक्सप्रेसवे पर अधिकतम औसत गति को 120 किलोमीटर प्रति घंटा से घटाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा करने का फैसला लिया गया है. इसके साथ ही पेट्रोलिंग बढ़ाने, अतिरिक्त पार्किंग सुविधाएं विकसित करने और कोहरे के दौरान चेतावनी देने वाले सिस्टम लगाने की योजना है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि रिपोर्टों में इन व्यवस्थाओं को नवंबर से लागू करने की तैयारी बताई गई है. इसलिए इसे सभी वाहनों पर तत्काल लागू हो चुका नया नियम मानने के बजाय प्रस्तावित या घोषित सुरक्षा बदलाव के रूप में समझना चाहिए.
क्यों घटाई जा रही है एक्सप्रेसवे पर रफ्तार?
एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार और सर्दियों में कम दृश्यता सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकती है. घने कोहरे में आगे चल रहे वाहन, सड़क पर खड़े वाहन या अचानक सामने आने वाली बाधाएं देर से दिखाई देती हैं. ऐसे में, तेज गति पर वाहन को समय रहते रोकना मुश्किल हो सकता है. इसी जोखिम को कम करने के लिए यूपीडा ने औद्योगिक अवस्थापना आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद गति नियंत्रण समेत कई सुरक्षा उपायों पर काम करने का फैसला किया है. इनका उद्देश्य दुर्घटनाओं में कमी लाना और यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराना है.
हर 40 किलोमीटर पर तैनात होगी पेट्रोलिंग टीम
यूपीडा एक्सप्रेसवे पर निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने जा रहा है. अभी जहां लगभग हर 50 किलोमीटर पर एक पेट्रोलिंग टीम तैनात है, वहीं नई योजना के तहत इसे घटाकर हर 40 किलोमीटर पर टीम तैनात करने की तैयारी है. इससे दुर्घटना या वाहन खराब होने की स्थिति में यात्रियों को जल्द सहायता मिल सकेगी.
इसके अलावा, दुर्घटना की आशंका वाले स्थानों पर विशेष निगरानी और जरूरत के मुताबिक वाहन चालकों की अल्कोहल जांच की व्यवस्था करने की भी बात सामने आई है.
हर 50 किलोमीटर पर मिलेगी पार्किंग की सुविधा
लंबे सफर के दौरान थकान और नींद आना भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन सकता है. इसे ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे पर अतिरिक्त पार्किंग और विश्राम सुविधाएं विकसित करने की योजना है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मौजूदा स्टॉपेज के बीच लगभग 100 किलोमीटर, गंगा एक्सप्रेसवे पर 66 किलोमीटर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर 70 किलोमीटर तक की दूरी है. नई योजना में औसतन हर 50 किलोमीटर पर अतिरिक्त पार्किंग सुविधा विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है.
कोहरे से निपटने के लिए लगेंगी फॉग लाइटें
सर्दियों में दृश्यता कम होने पर वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए एक्सप्रेसवे पर फॉग लाइटें और मौसम की जानकारी देने वाले सेंसर आधारित अनाउंसमेंट सिस्टम लगाने की तैयारी है. इनसे चालकों को आगे के मौसम और दृश्यता की स्थिति के बारे में समय रहते चेतावनी मिल सकेगी.
वाहन चालक इन बातों का रखें ध्यान
– कोहरे में निर्धारित गति से भी धीमी रफ्तार पर वाहन चलाएं.
– आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें.
– थकान या नींद आने पर सुरक्षित पार्किंग स्थल पर रुककर आराम करें.
– एक्सप्रेसवे पर लगे संकेतकों और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें.
एक्सप्रेसवे पर सफर करने वालों के लिए जरूरी सलाह
यूपीडा की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सर्दियों में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और एक्सप्रेसवे पर सफर को सुरक्षित बनाना है. हालांकि, वाहन चालकों को नई गति सीमा और उसके लागू होने की तारीख के लिए यूपीडा की आधिकारिक अधिसूचना तथा एक्सप्रेसवे पर लगे संकेतकों को प्राथमिकता देनी चाहिए.
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