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Delhi Air Pollution: सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- पुराने तरीकों से नहीं सुधरेगी दिल्ली की हवा

Supreme Court on Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR में लगातार बिगड़ती हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर चिंता जताई है. शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को वायु प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने प्रदूषण की समस्या और इससे निपटने के तरीकों पर अहम टिप्पणी की. कोर्ट का मानना है कि दिल्ली जैसे बड़े शहर में प्रदूषण से निपटने के लिए केवल पुराने नियमों और पारंपरिक उपायों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा. इसके लिए नए और व्यावहारिक तरीके अपनाने की जरूरत है.

इस बीच राजधानी की हवा भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण के कारणों और उन्हें रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर गंभीरता दिखाई है.

दिल्ली के लोगों की प्रतिभा का इस्तेमाल करने की जरूरत
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली के लोगों की प्रतिभा और उनकी क्षमता का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि प्रदूषण जैसी बड़ी समस्या का समाधान निकालने में आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है. केवल सरकारी आदेश जारी करने से हालात नहीं बदलेंगे. प्रशासन, विशेषज्ञों और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा.

कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए नए विचारों और बेहतर योजना की जरूरत है. पुराने तरीकों को बिना उनकी सफलता का आकलन किए लगातार लागू करते रहना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता.

पुराने तरीकों से नहीं सुलझेगी प्रदूषण की समस्या
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि क्या प्रदूषण रोकने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का सही इस्तेमाल किया जा रहा है? उन्होंने पुराने और पहले आजमाए जा चुके उपायों पर निर्भर रहने के बजाय नए समाधान खोजने की जरूरत बताई.

कोर्ट में मौजूद केंद्र सरकार के वकील ने बताया कि दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत प्रदूषण के स्तर के अनुसार अलग-अलग पाबंदियां लगाई जाती हैं. इस पर CJI ने कहा कि केवल प्रदूषण को नियंत्रित करने की कोशिश करना काफी नहीं है, बल्कि इसके असली कारणों को खत्म करना जरूरी है.

गाड़ियों से निकलने वाला धुआं सबसे बड़ी चिंता
सुनवाई के दौरान वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर विशेष चर्चा हुई. वरिष्ठ अधिवक्ता और मामले में न्याय मित्र अपराजिता सिंह ने कहा कि दिल्ली-NCR में परिवहन व्यवस्था प्रदूषण का बड़ा कारण है. सड़कों पर लगातार लगने वाला जाम और वाहनों का धुआं हवा को जहरीला बना रहा है.

CJI सूर्यकांत ने भी दिल्ली को NCR से जोड़ने वाली सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारों पर चिंता जताई. उन्होंने सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने की जरूरत बताई. कोर्ट को यह भी बताया गया कि टोल प्लाजा से जुड़े पुराने आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है. इसके कारण सीमा पर वाहनों को रुकना पड़ता है और वे लंबे समय तक धुआं छोड़ते रहते हैं.

पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को मिलेगी मदद
सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने की समस्या पर भी अहम सुझाव दिए. CJI ने कहा कि किसानों को पराली बेचने पर मिलने वाली कीमत की जानकारी पहले से दी जानी चाहिए, ताकि वे उसे जलाने के बजाय बेचने के लिए तैयार हों.

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पराली इकट्ठा करने वाली मशीनें व्यक्तिगत किसानों के बजाय ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जाएं. इससे छोटे किसानों को भी मदद मिलेगी. कोर्ट ने पराली रखने के लिए गोदाम बनाने की संभावना पर भी चर्चा की.

दिल्ली का AQI 389, कई इलाकों में स्थिति गंभीर
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच दिल्ली की हवा की गुणवत्ता भी बेहद खराब रही. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, 6 नवंबर की सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत AQI 389 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है. वहीं, IIT दिल्ली और रोहिणी में AQI 474, पंजाबी बाग में 465 और आरके पुरम में 443 दर्ज किया गया. इन इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई.

प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए प्रशासन GRAP के दूसरे चरण के तहत पानी का छिड़काव जैसे कदम उठा रहा है. अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के सुझावों और सरकारी प्रयासों से दिल्ली के लोगों को जहरीली हवा से कितनी राहत मिलती है.

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