Haryana Power Employees Strike: हरियाणा में बिजली विभाग के करीब 40 हजार कर्मचारियों और इंजीनियरों की प्रदेशव्यापी हड़ताल से जनजीवन प्रभावित है. शुक्रवार को हड़ताल के दूसरे दिन गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत कई जिलों में बिजली आपूर्ति बाधित रहने, पेयजल संकट बढ़ने और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं. शुरुआती रिपोर्टों में करीब 15 जिलों में बिजली संकट की बात कही गई है. हालांकि, पूरे राज्य में सभी जगह बिजली बंद होने की पुष्टि नहीं हुई है.
निजी बिजली वितरण लाइसेंस के विरोध में हड़ताल
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का प्रमुख कारण हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) का 19 अक्टूबर 2026 का फैसला है. आयोग ने निजी कंपनी Eleven Power Private Limited को गुरुग्राम और नूंह में 25 वर्षों के लिए बिजली वितरण का समानांतर लाइसेंस दिया है. कर्मचारी संगठनों को आशंका है कि इस फैसले से सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था, कर्मचारियों की नौकरी और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हो सकते हैं.
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए तीन दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है. हड़ताल 21 अक्टूबर की रात 10 बजे शुरू हुई और 24 अक्टूबर तक निर्धारित है.
15 जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित
23 अक्टूबर की सुबह प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, भिवानी, करनाल, यमुनानगर, अंबाला, हिसार, कैथल, फतेहाबाद और अन्य क्षेत्रों में बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं. कई इलाकों में 24 से 28 घंटे तक आपूर्ति बाधित रहने की खबरें हैं.
कर्मचारी संगठन के एक पदाधिकारी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में 33 केवी के 118 सब-स्टेशनों और 11 केवी के 510 से अधिक फीडरों में खराबी या ब्रेकडाउन का दावा किया गया है. ये आंकड़े संगठन की ओर से बताए गए हैं, इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित सरकारी आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए.
गुरुग्राम और फरीदाबाद में जनता परेशान
बिजली आपूर्ति बाधित होने से घरों में पानी की मोटरें बंद पड़ रही हैं. आवासीय सोसायटियों, दुकानों और औद्योगिक इकाइयों में कामकाज प्रभावित हुआ है. गुरुग्राम और फरीदाबाद में लोगों ने बिजली बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन किए और कुछ स्थानों पर सड़क जाम होने की खबरें आई हैं. बिजली संकट का असर इंटरनेट कनेक्टिविटी, कार्यालयों और स्कूलों की गतिविधियों पर भी पड़ा है.
सरकार और बिजली मंत्री का क्या कहना है?
हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने हड़ताल को अनुचित बताया है. उनका कहना है कि निजी वितरण लाइसेंस का फैसला नियामक आयोग ने किया है और उसके खिलाफ कानूनी मंच पर चुनौती दी जा सकती है. वहीं, राज्य सरकार की ओर से आयोग के फैसले को अपीलीय मंच पर चुनौती देने की बात भी रिपोर्ट की गई है.
आगे क्या होगा?
हड़ताल 24 अक्टूबर तक निर्धारित है. बिजली आपूर्ति सामान्य होने का समय स्थानीय फीडर की स्थिति, तकनीकी खराबी और कर्मचारियों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा. उपभोक्ताओं को अपने बिजली निगम के आधिकारिक हेल्पलाइन या स्थानीय कार्यालय से शिकायत दर्ज कराने और बिजली बहाली की पुष्टि लेने की सलाह दी जाती है.
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