PM RAHAT Scheme: सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले लोगों के लिए केंद्र सरकार की PM RAHAT योजना काफी मददगार साबित हो रही है. अक्सर हादसे के बाद समय पर इलाज नहीं मिलने या अस्पताल का खर्च उठाने में असमर्थ होने के कारण लोगों की जान चली जाती है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सरकार ने PM RAHAT (प्रधानमंत्री- सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार) योजना शुरू की है.
इस योजना के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को 1.5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है. खास बात यह है कि इसके लिए घायल व्यक्ति को पहले से किसी सरकारी स्वास्थ्य योजना का लाभार्थी होना जरूरी नहीं है. आइए जानते हैं कि 8 नवंबर 2026 तक उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार इस योजना का लाभ किसे मिलेगा और इसका फायदा उठाने के लिए क्या करना होगा.
PM RAHAT योजना में कितने रुपए तक मिलेगा मुफ्त इलाज?
PM RAHAT योजना को देशभर में 13 फरवरी 2026 को लागू किया गया था. इसके तहत मोटर वाहन से हुई सड़क दुर्घटना में घायल प्रत्येक पात्र व्यक्ति को अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक के इलाज की सुविधा मिलती है.
इस योजना में दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक या 1.5 लाख रुपए तक के इलाज का खर्च (इनमें से जो पहले पूरा हो) कवर किया जाता है. यानी घायल व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने और इलाज कराने के लिए अपनी जेब से पैसे देने की जरूरत नहीं होती, बशर्ते इलाज योजना के नियमों और निर्धारित पैकेज के तहत हो.
यह सुविधा किसी एक खास सड़क तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, शहर की सड़क या ग्रामीण सड़क पर मोटर वाहन से हुई दुर्घटना के पीड़ित भी इसके दायरे में आते हैं.
किन लोगों को मिलेगा PM RAHAT योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ मोटर वाहन के इस्तेमाल से हुई सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को दिया जाता है. इसके लिए व्यक्ति की उम्र, आय या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई अलग शर्त नहीं रखी गई है.
यानी बाइक, कार, बस, ट्रक या अन्य मोटर वाहनों से जुड़े सड़क हादसों में घायल व्यक्ति इस योजना के तहत मुफ्त इलाज का लाभ उठा सकता है. हालांकि, इसके लिए घायल को योजना के तहत सूचीबद्ध यानी सरकार द्वारा निर्धारित सरकारी या निजी अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है. साथ ही, योजना से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया भी पूरी होनी चाहिए.
PM RAHAT योजना का लाभ लेने की पूरी प्रक्रिया
इस योजना का लाभ लेने के लिए अलग से ऑनलाइन फॉर्म भरने या पहले से रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं है. दुर्घटना होने पर नीचे दिए गए तरीके से मदद ली जा सकती है.
1. सबसे पहले 112 नंबर पर कॉल करें: सड़क हादसे के बाद घायल व्यक्ति, उसके परिजन या मौके पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 पर फोन कर सकता है. इस नंबर से एंबुलेंस और नजदीकी निर्धारित अस्पताल की जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलती है.
2. घायल को अस्पताल पहुंचाएं: दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को जल्द से जल्द योजना के तहत निर्धारित अस्पताल पहुंचाना चाहिए. जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस की सहायता ली जा सकती है.
3. अस्पताल में इलाज शुरू होगा: अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टर घायल व्यक्ति की स्थिति के अनुसार इलाज शुरू करेंगे. अस्पताल योजना के डिजिटल सिस्टम पर इलाज से जुड़ी जानकारी दर्ज करेगा.
4. पुलिस करेगी जरूरी सत्यापन: अस्पताल की ओर से दुर्घटना और घायल व्यक्ति की जानकारी पुलिस के डिजिटल सिस्टम eDAR पर भेजी जाती है. इसके बाद पुलिस निर्धारित समय के भीतर मामले का सत्यापन करती है.
5. इलाज का खर्च सरकार उठाएगी: पात्र मामले में अस्पताल को इलाज का भुगतान योजना के तहत निर्धारित व्यवस्था से किया जाता है. मरीज को निर्धारित सीमा के भीतर कवर होने वाले इलाज के लिए भुगतान नहीं करना पड़ता.
शुरुआती इलाज के लिए 24 और 48 घंटे की व्यवस्था
योजना में केवल इलाज के खर्च की सीमा ही तय नहीं की गई है, बल्कि शुरुआती उपचार को लेकर भी विशेष व्यवस्था है. गैर-जानलेवा मामलों में निर्धारित अस्पतालों में 24 घंटे तक और जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार (मरीज की हालत स्थिर करने के लिए) की सुविधा दी जाएगी. इस दौरान पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी की जाती है. यानी 24 और 48 घंटे शुरुआती इलाज के लिए हैं, जबकि सात दिन पूरे इलाज की अधिकतम समय-सीमा है.
अस्पताल इलाज से मना करे तो क्या करें?
सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार, पात्र घायल व्यक्ति को योजना के तहत अस्पताल में भर्ती करने या इलाज देने से इनकार करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. ऐसी स्थिति में मरीज के परिजन जिला स्तर पर नियुक्त शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) या जिला सड़क सुरक्षा समिति से संपर्क कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर शिकायत जिला कलेक्टर और राज्य सड़क सुरक्षा परिषद तक पहुंचाई जा सकती है.
इलाज के दौरान मौत होने पर कौन उठाएगा खर्च?
अगर सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो जाती है, तब भी PM RAHAT योजना के तहत उसकी मौत की तारीख तक हुए पात्र इलाज का खर्च अस्पताल को दिया जाएगा. इसके लिए अधिकतम 1.5 लाख रुपए की सीमा और दुर्घटना की तारीख से सात दिनों की समय-सीमा लागू रहेगी. इस खर्च का भुगतान Motor Vehicle Accident Fund (MVAF) के माध्यम से किया जाएगा.
अब तक कितने लोगों को मिला PM RAHAT का लाभ?
सरकार की ओर से 12 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 31 जुलाई 2026 तक देशभर में कुल 22,481 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को इस योजना से लाभ मिला था. इस अवधि में अस्पतालों के 12.59 करोड़ रुपए के दावे मंजूर किए गए, जबकि 10.56 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया जा चुका था.
क्या है PM RAHAT योजना का मुख्य उद्देश्य?
इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य सड़क दुर्घटना के बाद पैसों की कमी के कारण किसी घायल व्यक्ति का इलाज न रुकने देना है. दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है. इस दौरान सही इलाज मिलने से घायल व्यक्ति की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है.
इसलिए सड़क पर दुर्घटना देखने पर घायल की मदद करने में देरी न करें. तुरंत 112 पर कॉल करें और एंबुलेंस व नजदीकी निर्धारित अस्पताल की मदद लें. याद रखें, PM RAHAT योजना का लाभ लेने के लिए पहले से आवेदन करने की जरूरत नहीं है.
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