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ईरान युद्ध के नाम पर ठगी! भारत में एक्टिव हुआ करोड़ों का चैरिटी स्कैम

Iran Conflict Donation Fraud: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव और हमलों के बीच भारत में डोनेशन की पहल तेज हो गई है. कई लोग इंसानियत के आधार पर ईरान के लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं. लेकिन इसी बीच कट्टरपंथ फैलाने और चैरिटी स्कैम से जुड़ी खबरें भी सामने आ रही हैं.

भारत के गृह मंत्रालय ने पहले ही ईरान में युद्ध की स्थिति का फायदा उठाकर कट्टरपंथ फैलाने की कोशिश करने वाले कुछ लोगों को लेकर एडवाइजरी जारी की थी. अब इंटेलिजेंस ब्यूरो ने भी एक बड़े चैरिटी स्कैम को लेकर अलर्ट जारी किया है.

जानकारी के मुताबिक, ईरान में युद्ध के नाम पर डोनेशन इकट्ठा करने वाले कई समूह सक्रिय हो गए हैं. अधिकारी बताते हैं कि ये लोग युद्ध से प्रभावित लोगों की मदद के बहाने फंड जमा कर रहे हैं. पिछले साल जब इजरायल और फिलिस्तीन के बीच युद्ध हुआ था, तब भी इसी तरह की गतिविधियां सामने आई थीं.

अधिकारियों का कहना है कि ऐसे समय में कई नकली चैरिटी अचानक शुरू हो जाती हैं और एक बार फंड जमा होने के बाद गायब हो जाती हैं. ये लोग भावनात्मक तरीके से लोगों को उकसाते हैं और युद्ध की तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर डोनेशन मांगते हैं.

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, कई लोग भावुक होकर पैसे ही नहीं, बल्कि सोना तक दान कर देते हैं. एजेंसियों को सबसे ज्यादा ऐसे मामले जम्मू-कश्मीर में मिले हैं, जहां कुछ लोग घर-घर जाकर ईरान युद्ध से प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर डोनेशन मांग रहे हैं.

जांच में यह भी सामने आया है कि ये लोग हालात को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं और लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर उन्हें धोखा देते हैं. अधिकारियों का दावा है कि यह वही नेटवर्क हो सकता है जो पहले अलगाववादी समूहों के लिए फंड इकट्ठा करता था.

रिपोर्ट के मुताबिक, केवल जम्मू-कश्मीर में ही यह स्कैम करीब 16 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. कई लोगों ने अपनी बचत, सोना और यहां तक कि तांबे के बर्तन तक दान कर दिए हैं.

एक अधिकारी के अनुसार, इन ठगों का मुख्य निशाना शिया समुदाय के लोग रहे हैं, जिन्हें ईरान में चल रहे युद्ध से जुड़ी भावनाओं के आधार पर प्रभावित किया जाता है. भावनात्मक अपील के जरिए उनसे आसानी से डोनेशन लिया जाता है और कई बार वे बिना ज्यादा सवाल किए ही पैसे दे देते हैं.

एजेंसियों का कहना है कि अब ये लोग ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन तरीके अपना रहे हैं, ताकि उन्हें आसानी से ट्रैक न किया जा सके. नकली रसीदें देकर लोगों से कहा जाता है कि पैसा ईरान में युद्ध से प्रभावित लोगों तक पहुंचाया जाएगा.

अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जमा किया गया फंड कहां इस्तेमाल हो रहा है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि इसका एक हिस्सा देश विरोधी गतिविधियों में भी इस्तेमाल हो सकता है. इसी वजह से एजेंसियां देश के कई हिस्सों में ऐसी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं.

यह भी पढ़ें- तेल और गैस के साथ अब इंटरनेट भी निशाने पर, ईरान का कदम भारत पर भी पड़ेगा भारी

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