Homeक्राइमदेश में साइबर क्राइम का नया चेहरा: 'डिजिटल अरेस्ट' का जाल

देश में साइबर क्राइम का नया चेहरा: ‘डिजिटल अरेस्ट’ का जाल

Digital Arrest Scam: भारत में साइबर क्राइम का एक नया और खतरनाक रूप तेजी से सामने आ रहा है, जिसे “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम कहा जा रहा है. इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, RBI या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं. हाल के महीनों में इस तरह के मामलों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं.

क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?
डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ठगों द्वारा बनाया गया एक झूठा जाल है. इसमें अपराधी फोन कॉल, वीडियो कॉल या मैसेज के जरिए लोगों को बताते हैं कि वे किसी गंभीर अपराध जैसे- मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स केस में शामिल हैं. इसके बाद वे नकली वारंट, FIR और सरकारी दस्तावेज दिखाकर पीड़ित को “ऑनलाइन हिरासत” में होने का दावा करते हैं.

करोड़ों की ठगी के सामने आए मामले
हालिया मामलों ने इस ठगी की गंभीरता को उजागर किया है. कर्नाटक में एक कारोबारी से करीब 15 करोड़ रुपये की ठगी की गई. वहीं, गुजरात और उत्तर प्रदेश में भी करोड़ों के घोटाले सामने आए हैं. लखनऊ में एक रिटायर्ड इंजीनियर को दो महीने तक मानसिक दबाव में रखकर 1 करोड़ से ज्यादा की ठगी की गई.

मुंबई के 69 वर्षीय एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को साइबर ठगों ने 25 दिनों तक तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा. इस दौरान खुद को पुलिस और अदालत का अधिकारी बताकर अपराधियों ने उनसे 1.57 करोड़ रुपये की ठगी कर ली. इन घटनाओं से साफ है कि यह गिरोह संगठित तरीके से देशभर में सक्रिय हैं.

कैसे काम करता है यह गिरोह?
इस स्कैम में अपराधी बेहद प्रोफेशनल तरीके अपनाते हैं.

नकली पुलिस यूनिफॉर्म और ऑफिस बैकग्राउंड का इस्तेमाल
वीडियो कॉल पर घंटों तक पीड़ित को बंधक बनाकर रखना
डर और मानसिक दबाव बनाकर तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाना
कई “म्यूल अकाउंट्स” के जरिए पैसों को घुमाना

अक्सर पीड़ितों को कहा जाता है कि जांच पूरी होने तक वे किसी से बात न करें, जिससे वे अलग-थलग पड़ जाते हैं.

सरकार और एजेंसियों की कार्रवाई
बढ़ते मामलों को देखते हुए जांच एजेंसियां सख्त हो गई हैं. कई राज्यों में बड़े स्तर पर छापेमारी कर गिरोहों को पकड़ा जा रहा है और बैंक खातों को फ्रीज किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में सख्त रुख अपना चुका है और देशभर में जांच के निर्देश दिए गए हैं.

बचाव के लिए क्या करें?
किसी भी अनजान कॉल पर डरें नहीं, तुरंत जांच करें
कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती
OTP, बैंक डिटेल या स्क्रीन शेयर कभी न करें
ऐसे मामलों की शिकायत तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर करें

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
“डिजिटल अरेस्ट” स्कैम तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का खतरनाक मिश्रण है. जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार है. यदि लोग सतर्क रहें और समय रहते शिकायत करें, तो इस बढ़ते साइबर खतरे पर काबू पाया जा सकता है.

यह भी पढ़ें- ईरान युद्ध के नाम पर ठगी! भारत में एक्टिव हुआ करोड़ों का चैरिटी स्कैम

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