India SIR Controversy: भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब अमेरिका तक पहुंच गया है. भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की खबरों पर चिंता जताई है. उन्होंने इसकी तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीतियों से करते हुए कहा कि दोनों देशों में मतदान के अधिकारों को कमजोर करने जैसी स्थिति दिखाई दे रही है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी को अमेरिका से फंडिंग मिलने के आरोप भी चर्चा में हैं. हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का प्रमाण सामने नहीं आया है.
प्रमिला जयपाल ने SIR पर क्या कहा?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने बुधवार, 14 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत की मतदाता सूची से करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने से जुड़ी रिपोर्टों पर चिंता जताई. उन्होंने भारत में कथित लोकतंत्र-विरोधी प्रयासों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों का समर्थन किया और निष्पक्ष चुनाव के महत्व पर जोर दिया.
जयपाल ने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की नीतियों से की. उनके मुताबिक, दोनों जगह मतदान के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिशों से जुड़े सवाल उठ रहे हैं. यह उनका राजनीतिक आकलन है, इसे किसी न्यायिक निष्कर्ष या भारत में चुनावी अनियमितताओं के अंतिम प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
SIR में कितने नाम हटाए जाने की बात सामने आई?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, दोहरे या अन्य कारणों से अपात्र मतदाताओं के नामों की पहचान करना बताया गया है. हालांकि, विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई है कि प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी छूट सकते हैं.
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पहले और दूसरे चरण में 13 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की ड्राफ्ट सूचियों से लगभग 7.2 करोड़ नाम हटाए गए थे. तीसरे चरण में प्रकाशित सूचियों में करीब 6.16 करोड़ नाम हटने की जानकारी दी गई. आयोग का कहना है कि जिन वास्तविक मतदाताओं के नाम गलती से छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
अभिजीत दीपके और CJP की अमेरिकी फंडिंग पर क्या विवाद है?
इसी बीच, अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने आरोप लगाया कि अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी दानदाता अभिजीत दीपके और उनकी Cockroach Janata Party (CJP) को आर्थिक मदद दे रहे हैं. दीपके ने विदेशी नागरिकों के भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए पलटवार किया.
लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों में कथित दानदाताओं के नाम या ऐसे सत्यापित वित्तीय दस्तावेज सामने नहीं आए हैं, जो इन आरोपों की पुष्टि करते हों. इसलिए अमेरिकी फंडिंग के दावे को साबित तथ्य बताना उचित नहीं होगा.
क्या प्रमिला जयपाल का बयान CJP को समर्थन है?
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में जयपाल के बयान को भारत में SIR और मतदाता अधिकारों पर उनकी चिंता के रूप में पेश किया गया है. ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है कि उन्होंने अभिजीत दीपके या CJP को सीधे समर्थन दिया हो. इसलिए SIR पर उनकी टिप्पणी और CJP की कथित विदेशी फंडिंग को दो अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखना जरूरी है.
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