Oil and Gas Discovery India: भारत अब ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा रहा है. केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 में देश का सबसे बड़ा तेल और प्राकृतिक गैस खोज अभियान तेज कर दिया है. सरकार का उद्देश्य देश में छिपे हाइड्रोकार्बन भंडार का पता लगाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है. इसी कड़ी में नए एक्सप्लोरेशन ब्लॉक्स कंपनियों के लिए खोले गए हैं और कई संवेदनशील इलाकों में सर्वे का काम शुरू हो चुका है.
2.62 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खोज अभियान
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत OALP-XI (Open Acreage Licensing Policy) राउंड के जरिए करीब 2.62 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तेल और गैस खोज के लिए उपलब्ध कराया गया है. इसे अब तक का सबसे बड़ा एक्सप्लोरेशन कवरेज माना जा रहा है. इस अभियान में ऑनशोर यानी जमीन वाले क्षेत्रों के साथ-साथ ऑफशोर और गहरे समुद्री हिस्सों को भी शामिल किया गया है.
सरकार का मानना है कि भारत में अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बड़े पैमाने पर तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार मौजूद हो सकते हैं, लेकिन आधुनिक तकनीक की कमी और सीमित खोज के कारण उनका पता नहीं चल पाया.
अंडमान से राजस्थान तक सरकार की नजर
सूत्रों के अनुसार, सरकार की विशेष नजर अंडमान सागर, कृष्णा-गोदावरी बेसिन, कच्छ क्षेत्र, राजस्थान, पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिमी समुद्री तट पर है. विशेषज्ञों का कहना है कि अंडमान और गहरे समुद्री क्षेत्रों में बड़े हाइड्रोकार्बन रिजर्व मिलने की संभावना काफी अधिक है.
इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में भी तेल और गैस खोज गतिविधियों को फिर से तेज किया जा रहा है. असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में नई तकनीक से सर्वे शुरू करने की तैयारी है. राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में भी अतिरिक्त ड्रिलिंग की योजना बनाई गई है.
ONGC और निजी कंपनियां निभाएंगी बड़ी भूमिका
सरकारी कंपनी ONGC इस मिशन की सबसे बड़ी भागीदार होगी. कंपनी ने गहरे समुद्र में ड्रिलिंग और खोज के लिए बड़े निवेश की योजना तैयार की है. इसके साथ ही निजी और विदेशी कंपनियों को भी एक्सप्लोरेशन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिए कई नियमों को आसान बनाया है. रॉयल्टी में राहत, डेटा एक्सेस और तेज मंजूरी जैसी सुविधाएं कंपनियों को दी जा रही हैं, ताकि खोज कार्य में तेजी लाई जा सके.
आयात पर निर्भरता घटाना सबसे बड़ा लक्ष्य
भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ता है.
हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है. ऐसे में, सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना चाहती है. यदि देश में नए भंडार मिलते हैं तो आने वाले वर्षों में आयात बिल कम हो सकता है.
प्राकृतिक गैस पर भी बढ़ रहा फोकस
सरकार केवल कच्चे तेल ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक गैस उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. भारत गैस आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहता है. CNG, PNG और गैस आधारित उद्योगों के विस्तार के कारण प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है.
इसी वजह से समुद्री गैस पाइपलाइन परियोजनाओं और LNG इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से काम किया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा जरूरतों में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को काफी बढ़ाना है.
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह महाअभियान सफल रहा तो भारत को आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा फायदा मिलेगा. घरेलू तेल और गैस उत्पादन बढ़ने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा संकट की स्थिति में देश ज्यादा सुरक्षित रहेगा.
सरकार का यह अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है जब दुनिया के कई देश ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई रणनीति बना रहे हैं. ऐसे में, भारत का यह कदम आने वाले वर्षों में देश को ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिला सकता है.
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