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ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी पर सियासी घमासान, कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा

Petrol Diesel Price Hike: देशभर में पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है. शुक्रवार को तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. खासतौर पर कांग्रेस ने इस फैसले को आम जनता पर “महंगाई का बोझ” बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा. दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3.25 रुपये की बढ़ोतरी किए जाने पर कांग्रेस ने इसे जनता पर “महंगाई के कोड़े बरसाने” जैसा कदम बताया.

वसूली शुरू…
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “चुनाव खत्म – मोदी की वसूली शुरू.” पार्टी ने आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जबकि सीएनजी के दाम भी बढ़ाए गए हैं. कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री को “महंगाई मैन” बताते हुए दावा किया कि सरकार चुनावी दौर खत्म होते ही जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है.

कांग्रेस का कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियों, खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं. पार्टी ने इसे मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए बड़ी चिंता बताया.

ईंधन की नई कीमतों से बढ़ी चिंता
नई दरों के मुताबिक, दिल्ली में पेट्रोल लगभग 97 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है. मुंबई, कोलकाता और अन्य महानगरों में भी कीमतों में तेज उछाल देखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया के तनाव का असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है.

विपक्ष का हमला तेज
कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि “अब साइकिल ही सबसे अच्छा विकल्प है.” वहीं विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जनता को राहत देने के बजाय महंगाई बढ़ाने वाले फैसले ले रही है.

सरकार की ओर से क्या तर्क?
सरकारी सूत्रों और तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण घरेलू बाजार में कीमतों में संशोधन करना पड़ा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है, जिससे आयात लागत बढ़ी है.

राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब आम जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और बढ़ेंगी या सरकार राहत देने के लिए कोई कदम उठाएगी.

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