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रेफर करने की आदत अब नहीं चलेगी! बिहार में सरकारी डॉक्टरों पर सख्ती, डिजिटल निगरानी बढ़ाने की तैयारी

Bihar Healthcare Reforms 2026: बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए सरकारी डॉक्टरों पर सख्ती बढ़ा दी है. स्वास्थ्य विभाग अब सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, अनावश्यक रेफरल रोकने और निजी प्रैक्टिस पर नियंत्रण को लेकर लगातार निगरानी कर रहा है. सरकार का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए यह कदम जरूरी है.

बायोमेट्रिक हाजिरी पर जोर
स्वास्थ्य विभाग ने कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में बायोमेट्रिक व डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को और सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति अब ऑनलाइन मॉनिटरिंग से जोड़ी जा रही है, ताकि ड्यूटी में लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि कई अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायतें लगातार मिल रही थीं. इसी कारण डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है. विभागीय अधिकारियों को भी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं.

“हर मरीज को रेफर” करने की प्रवृत्ति पर नजर
सरकार उन मामलों पर भी नजर रख रही है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों से मरीजों को मामूली कारणों पर बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है, जबकि कई मामलों का इलाज स्थानीय स्तर पर संभव होता है.

अब जिला स्तर पर रेफरल मामलों की समीक्षा की जा रही है. जिन अस्पतालों से अत्यधिक रेफरल की शिकायत मिलेगी, वहां प्रशासनिक जांच भी हो सकती है. सरकार चाहती है कि प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को अधिक सक्रिय और सक्षम बनाया जाए, ताकि मरीजों को अपने जिले में ही इलाज मिल सके.

निजी प्रैक्टिस पर पहले से जारी विवाद
बिहार सरकार पहले ही सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है. सरकार का तर्क है कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी क्लीनिक चलाने से अस्पतालों में मरीजों को पूरा समय और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती.

हालांकि डॉक्टर संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है. उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी है, ऐसे में डॉक्टरों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है. कई डॉक्टरों का यह भी कहना है कि निजी प्रैक्टिस पर पूर्ण रोक लगाने से विशेषज्ञ डॉक्टर सरकारी सेवा छोड़ सकते हैं.

स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने की कोशिश
सरकार का दावा है कि डिजिटल मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक उपस्थिति और रेफरल सिस्टम की समीक्षा से सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में सुधार आएगा. खासकर ग्रामीण इलाकों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने पर जोर दिया जा रहा है.

स्वास्थ्य विभाग आने वाले महीनों में अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर और कड़े कदम उठा सकता है. ऐसे में, यह देखना अहम होगा कि सरकार की सख्ती से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में कितना सुधार आता है और मरीजों को इसका कितना लाभ मिल पाता है.

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