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‘भरत के लिए नौकरी छोड़ दूंगा’ कहने वाला सिपाही होगा बर्खास्त, कई गंभीर आरोपों में पहले से था सस्पेंड

Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में लगातार नए मोड़ सामने आ रहे हैं. एक ओर न्यायिक जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है, वहीं दूसरी ओर भरत तिवारी के समर्थन में खुलकर सामने आए बिहार पुलिस के सिपाही आशीष तिवारी पर विभाग का शिकंजा कसता जा रहा है. पुलिस मुख्यालय ने संकेत दिए हैं कि गंभीर अनुशासनहीनता, पुराने आपराधिक मामलों और हालिया विवादित बयानों को देखते हुए उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. इसी बीच, भरत तिवारी के पिता और भाई को पुलिस ने बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामले से नाम हटा दिया है, जिससे पूरे प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है.

पुलिस की नौकरी छोड़ने वाले बयान के बाद बढ़ीं मुश्किलें
भरत तिवारी की मौत के बाद आयोजित महापंचायत में बिहार पुलिस के सिपाही आशीष तिवारी ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि यदि भरत को न्याय नहीं मिला तो वह पुलिस की नौकरी छोड़ देगा. उसने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ी तो वह “दूसरा भरत तिवारी” बनने से भी पीछे नहीं हटेगा. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और विभाग के संज्ञान में पहुंच गया. पुलिस अधिकारियों ने इसे सेवा नियमों का उल्लंघन मानते हुए मामले को गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा. अब विभागीय जांच लगभग पूरी हो चुकी है और उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की तैयारी चल रही है.

पहले से सस्पेंड था सिपाही
आशीष तिवारी पहले से ही बिहार पुलिस से निलंबित चल रहा है. उसके खिलाफ विभागीय जांच काफी पहले शुरू हो चुकी थी. अधिकारियों का कहना है कि उस पर लगे आरोप केवल हालिया बयान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसके सेवा रिकॉर्ड में कई गंभीर घटनाएं दर्ज हैं. इन्हीं मामलों के आधार पर उसे पहले निलंबित किया गया था और अब अंतिम विभागीय कार्रवाई की जा रही है.

थाने में फायरिंग का भी आरोपी
आशीष तिवारी के खिलाफ दर्ज मामलों में सबसे चर्चित आरोप थाने के भीतर फायरिंग करने का है. आरोप है कि उसने सरकारी हथियार का अनुचित इस्तेमाल किया था. इस घटना के बाद पुलिस विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया था. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पुलिस बल में हथियारों के दुरुपयोग को अत्यंत गंभीर अपराध माना जाता है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई का प्रावधान है.

थाने से निकलकर सड़क पर किया हंगामा
आरोप है कि सिपाही आशीष थाने से निकलकर सड़क पर पहुंचा और वहां कुछ राहगीरों को रोककर उनके साथ गाली-गलौज की. इतना ही नहीं, उसने कथित तौर पर पिस्तौल दिखाकर उन्हें धमकाया और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक भाजपा नेता को भी हथियार दिखाने का आरोप उस पर लगा. इसके बाद वह पुलिस क्वार्टर स्थित अपने कमरे में जाकर बंद हो गया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लगातार उसे आत्मसमर्पण करने के लिए समझाते रहे, लेकिन उसने किसी की बात नहीं मानी. कई घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद वह अपनी पिस्तौल वहीं छोड़कर मौके से फरार हो गया. बाद में उसे अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई. इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार पुलिस ने उसे निलंबित कर दिया और विभागीय कार्रवाई शुरू की गई.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर पिस्तौल तानने का आरोप
जांच में यह आरोप भी शामिल है कि एक विवाद के दौरान आशीष तिवारी ने अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर सरकारी पिस्तौल तान दी थी. हालांकि इस मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में इसे गंभीर कदाचार माना गया है. पुलिस मुख्यालय का मानना है कि यदि कोई वर्दीधारी कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस प्रकार का व्यवहार करता है तो यह पुलिस अनुशासन के लिए बेहद गंभीर मामला है. यही कारण है कि विभाग उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई के पक्ष में दिखाई दे रहा है.

खुद को बताया था भरत तिवारी का चचेरा भाई
महापंचायत के दौरान आशीष तिवारी ने खुद को भरत तिवारी का चचेरा भाई बताया था. उसने मंच से भावुक अपील करते हुए कहा कि वह अपने भाई को न्याय दिलाने के लिए हर लड़ाई लड़ेगा. उसके इस बयान के बाद लोगों ने उसे भरत तिवारी के परिवार का सदस्य मान लिया और सोशल मीडिया पर भी यही दावा तेजी से फैल गया.

परिवार ने खोली रिश्ते की सच्चाई
हालांकि बाद में भरत तिवारी के परिवार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया. भरत के भाई ने साफ कहा कि आशीष तिवारी उनका चचेरा भाई नहीं है और न ही उनका निकट संबंधी है. पुलिस का कहना है कि आशीष, भरत के गांव का ही रहने वाला है.

भरत के पिता और भाई हुए दोषमुक्त
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी राहत भरत तिवारी के पिता और भाई को मिली है. प्रारंभिक एफआईआर में उन पर भरत को संरक्षण देने और उसकी गतिविधियों की जानकारी छिपाने के आरोप लगाए गए थे. लेकिन जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर पुलिस ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोप वापस लेते हुए एफआईआर से उनके नाम हटा दिए. इससे परिवार को बड़ी कानूनी राहत मिली है. परिजनों का कहना है कि वे शुरू से ही निर्दोष थे और उन्हें केवल दबाव बनाने के लिए मामले में शामिल किया गया था.

न्यायिक जांच पर टिकी सबकी नजर
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच लगातार जारी है. जांच टीम घटनास्थल, पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर रही है. राज्य सरकार पहले ही संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज करा चुकी है. जांच रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि एनकाउंटर परिस्थितिजन्य था या फिर नियमों का उल्लंघन हुआ.

दोस्त के बयान से बढ़े सवाल
मामले में भरत तिवारी के दोस्त लखन कुमार के बयान ने भी जांच को नया मोड़ दिया है. उन्होंने दावा किया कि भरत को पकड़े जाने के बाद रास्ते में दोबारा गोली मारी गई थी. इस बयान के बाद जांच एजेंसियां घटनाक्रम की हर कड़ी को दोबारा खंगाल रही हैं. हालांकि इन दावों की पुष्टि न्यायिक जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी.

आगे क्या?
26 जून 2026 तक की स्थिति में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में दो समानांतर कार्रवाई चल रही हैं. पहली, न्यायिक जांच जो पूरे एनकाउंटर की सच्चाई सामने लाएगी. दूसरी, निलंबित सिपाही आशीष तिवारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, जिसमें बर्खास्तगी की प्रक्रिया अंतिम चरण में मानी जा रही है. वहीं भरत के पिता और भाई को दोषमुक्त किए जाने के बाद जांच का फोकस अब पूरी तरह एनकाउंटर और उससे जुड़े पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर केंद्रित हो गया है. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और विभागीय निर्णय इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेंगे.

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