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अमेरिकी हमले से दहला ईरान, टकराव खतरनाक मोड़ पर, होर्मुज स्ट्रेट बंद

US Strikes Iran: मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य संकट के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है. 11 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया, जब अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए. इसके बाद ईरान के कई क्षेत्रों में विस्फोटों, एयर डिफेंस गतिविधियों और सैन्य अलर्ट की खबरें सामने आईं. जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा कर दी. इस घटनाक्रम ने न केवल पूरे मध्य पूर्व को हिला दिया है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में भी उथल-पुथल मचा दी है.

दूसरे दिन भी जारी रहे अमेरिकी हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान में कई लक्ष्यों पर अतिरिक्त “आत्मरक्षा हमले” किए हैं. इन हमलों को उस घटना के जवाब के रूप में देखा जा रहा है जिसमें होर्मुज क्षेत्र में एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया गया था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया था कि ईरान के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी तेहरान, बंदर अब्बास, केशम द्वीप, हेंगाम, सिरिक, मीनाब और फार्स प्रांत के कुछ हिस्सों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं. ईरानी मीडिया ने बताया कि हवाई हमलों से निपटने के लिए कई जगहों पर एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया.

ईरान के कई शहरों में अलर्ट
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने देश के कई हिस्सों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया. तेहरान और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया गया. बंदर अब्बास और होर्मुज क्षेत्र के आसपास सबसे अधिक सैन्य गतिविधियां देखी गईं.

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की तटीय निगरानी क्षमता, रडार नेटवर्क और सैन्य नियंत्रण केंद्रों को कमजोर करना है, ताकि होर्मुज क्षेत्र में उसकी रणनीतिक बढ़त बनी रहे.

होर्मुज स्ट्रेट बंद, दुनिया की बढ़ी चिंता
तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है. ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने घोषणा की है कि होर्मुज स्ट्रेट को सभी जहाजों के लिए बंद किया जा रहा है और किसी भी जहाज के गुजरने पर कार्रवाई की जा सकती है.

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. ऐसे में, इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की बाधा का असर सीधे दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.

हालांकि अमेरिका का दावा है कि कुछ वाणिज्यिक जहाज अब भी क्षेत्र से गुजर रहे हैं और समुद्री यातायात पूरी तरह बंद नहीं हुआ है. इसके बावजूद सुरक्षा जोखिम तेजी से बढ़ गए हैं.

ईरान की जवाबी कार्रवाई, अमेरिकी ठिकाने बने निशाना
अमेरिकी हमलों के कुछ घंटों बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी. IRGC ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन सहित क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया है.

ईरान के अनुसार, दो चरणों में किए गए हमलों में 18 महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया. वहीं अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन को रास्ते में ही रोक दिया गया और नुकसान सीमित रहा. ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी कार्रवाई जारी रहती है तो पूरे क्षेत्र में संघर्ष और फैल सकता है.

तेल बाजार में मची उथल-पुथल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर तुरंत वैश्विक बाजारों पर दिखाई दिया. 11 जून को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई.

ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों में उल्लेखनीय बढ़त देखी गई. निवेशकों को डर है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बाधित रहा तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच सकती हैं. ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट लंबे समय तक चला तो पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.

भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. ऐसे में, होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी प्रकार की अस्थिरता भारत के लिए चिंता का विषय है.

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो भारत को तेल आयात पर अधिक खर्च करना पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और देश की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. हालांकि फिलहाल भारतीय अधिकारियों की ओर से किसी आपात स्थिति की घोषणा नहीं की गई है.

कूटनीतिक प्रयास भी जारी
तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. कतर सहित कई क्षेत्रीय देशों ने दोनों पक्षों के बीच बातचीत की कोशिशें तेज कर दी हैं. अमेरिकी प्रशासन अब भी किसी “सार्थक समझौते” की बात कर रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि वह दबाव में कोई समझौता नहीं करेगा. संयुक्त राष्ट्र और कई प्रमुख देशों ने भी दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है.

आगे क्या?
11 जून 2026 की स्थिति में अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं. एक ओर अमेरिका लगातार सैन्य दबाव बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान जवाबी हमलों और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के जरिए अपनी शक्ति दिखाने की कोशिश कर रहा है.

तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह संकट कूटनीति के जरिए सुलझेगा या फिर मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान टकराव और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर टिकी हुई है.

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