PoK Protest 2026: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस गया है. रावलकोट और आसपास के इलाकों में पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों व प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है. स्थानीय संगठनों और आंदोलनकारियों का आरोप है कि सेना और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाईं, जिसके कारण 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई और करीब 200 लोग घायल हुए हैं. हालांकि पाकिस्तान प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में फिलहाल 11 मौतों और 70 से अधिक घायलों की आधिकारिक पुष्टि की गई है.
आखिर क्यों भड़का PoK?
विवाद की जड़ पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की विधानसभा में आरक्षित सीटों का मुद्दा बताया जा रहा है. क्षेत्रीय सरकार ने उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों को बरकरार रखने का फैसला किया है जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं. इस फैसले का लंबे समय से विरोध कर रहे संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और उससे जुड़े संगठनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस व्यवस्था के जरिए स्थानीय लोगों की राजनीतिक आवाज को कमजोर किया जा रहा है. इसी मुद्दे को लेकर पिछले कई दिनों से तनाव बढ़ रहा था और प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े कई नेताओं व समर्थकों को गिरफ्तार भी किया था.
रावलकोट बना हिंसा का केंद्र
रविवार और सोमवार के बीच हालात अचानक बिगड़ गए. प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और कई स्थानों पर सुरक्षा बलों के साथ उनकी भिड़ंत हुई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ इलाकों में आंसू गैस और लाठीचार्ज के बाद गोलीबारी की नौबत आ गई. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भगदड़, गोलियों की आवाज और घायल लोगों को अस्पताल ले जाते हुए देखा जा सकता है.
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन हिंसक हो गया था और कुछ लोगों ने सुरक्षा बलों पर भी हमला किया. वहीं आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने शांतिपूर्ण विरोध को बलपूर्वक कुचलने की कोशिश की.
मौतों के आंकड़ों पर विवाद
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा विवाद हताहतों की संख्या को लेकर है. पाकिस्तान प्रशासन और समाचार एजेंसियों के अनुसार कम से कम 11 लोगों की मौत हुई है, जिनमें प्रदर्शनकारी और सुरक्षा बलों के सदस्य दोनों शामिल हैं. 70 से अधिक लोगों के घायल होने की भी पुष्टि की गई है.
दूसरी ओर, JAAC और कई स्थानीय कार्यकर्ताओं का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है. कुछ संगठनों ने 27 से 30 से अधिक मौतों और लगभग 200 घायलों का आरोप लगाया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है.
पाकिस्तान सरकार और सेना पर उठे सवाल
घटना के बाद पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और केंद्रीय (संघीय) सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं. विपक्षी समूहों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि PoK में असहमति की आवाजों को दबाने के लिए कठोर बल प्रयोग किया जा रहा है.
कई कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि हाल के महीनों में क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों पर निगरानी बढ़ी है और विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां की गई हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंजा मामला
PoK में हुई हिंसा की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है. यूनाइटेड किंगडम में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों ने पाकिस्तान वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया और घटना की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई. कुछ ब्रिटिश सांसदों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है.
मानवाधिकार संगठन भी घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यदि प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
आगे क्या?
फिलहाल PoK के कई इलाकों में तनाव बना हुआ है. सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में बताने की कोशिश कर रहा है. दूसरी ओर, आंदोलनकारी संगठनों ने संघर्ष जारी रखने के संकेत दिए हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में क्षेत्र में और व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं. विधानसभा सीटों के विवाद, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर असंतोष पहले से मौजूद था, जिसे हालिया हिंसा ने और गहरा कर दिया है.
रावलकोट हिंसा के दूरगामी राजनीतिक असर
PoK में हुई यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लेकर आई है कि राजनीतिक असहमति से निपटने के लिए बल प्रयोग कितना उचित है. मौतों और घायलों की वास्तविक संख्या चाहे जो भी हो, इतना स्पष्ट है कि रावलकोट की हिंसा ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक प्रभाव दूरगामी हो सकते हैं.
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