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खून से सनी वर्दी, नम आंखें और न्याय की मांग… जंतर-मंतर हिंसा पर छलका घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का दर्द

Jantar Mantar Violence: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए और उन्होंने अपने दर्द को साझा किया. शुक्रवार (31 जुलाई) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस अधिकारियों और जवानों के परिजनों ने बताया कि ड्यूटी से लौटते समय उनके अपने खून से सनी वर्दी में घर पहुंचे थे. परिवारों ने कहा कि पुलिसकर्मी भी किसी के पिता, पति, बेटे और भाई होते हैं, इसलिए उनके साथ हुई हिंसा को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए.

‘घर लौटे तो वर्दी पूरी तरह खून से लाल थी’
घायल पुलिस अधिकारी के परिवार की एक सदस्य ने भावुक होते हुए कहा कि जब उनके पति घर लौटे तो उनकी वर्दी खून से लाल थी. परिवार के लिए वह पल बेहद भयावह था. उन्होंने बताया कि छोटी बच्ची अपने पिता की हालत देखकर रोने लगी और पूरे परिवार में डर का माहौल बन गया. परिजनों का कहना है कि पुलिसकर्मी हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर कानून-व्यवस्था बनाए रखते हैं, लेकिन उनके दर्द पर बहुत कम चर्चा होती है.

‘हेलमेट नहीं होता तो जान भी जा सकती थी’
एक अन्य घायल पुलिसकर्मी के परिवार ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान उनके पिता के सिर पर गंभीर हमला हुआ. यदि उन्होंने हेलमेट नहीं पहना होता तो उनकी जान भी जा सकती थी. परिवार का कहना है कि पुलिसकर्मियों पर हुए हमले को केवल ड्यूटी का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उन्हें भी सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए.

परिवारों ने न्याय और संवेदनशीलता की उठाई मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद परिजनों ने कहा कि जब भी किसी हिंसक घटना की चर्चा होती है, तब पुलिसकर्मियों की पीड़ा अक्सर पीछे छूट जाती है. उन्होंने सरकार, राजनीतिक दलों और समाज से अपील की कि घायल पुलिसकर्मियों के साथ भी न्याय हो और उनके परिवारों की मानसिक पीड़ा को समझा जाए. परिवारों ने यह भी कहा कि वे किसी राजनीतिक बहस का हिस्सा नहीं बनना चाहते, बल्कि केवल यह चाहते हैं कि ड्यूटी निभाते समय घायल हुए जवानों को उचित सम्मान और न्याय मिले.

20 जुलाई की झड़प के बाद बढ़ा विवाद
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी. दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस घटना में कई पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए थे, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे. घटना के बाद पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए और जांच जारी है. वहीं, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं.

परिवारों के भावुक बयान के बाद फिर चर्चा में आई जंतर-मंतर हिंसा
31 जुलाई को घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया. इसी बीच, सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिसकर्मियों के संगठन ने भी जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, ताकि ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के समर्थन में आवाज उठाई जा सके. हालांकि प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

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