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UPSC की स्थापना के 100 वर्ष पूरे, PM मोदी ने बताया आयोग का महत्व

UPSC Centenary Celebration 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित शताब्दी समारोह को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था और राष्ट्र निर्माण में आयोग की भूमिका को रेखांकित किया. प्रधानमंत्री ने UPSC के प्रति लोगों के भरोसे, निष्पक्ष चयन प्रक्रिया और बदलते समय के साथ संस्थान में आए बदलावों का जिक्र किया. इस अवसर पर उन्होंने शताब्दी स्मारक सिक्का, विशेष डाक टिकट और एक पुस्तक भी जारी की.

UPSC पर देश का भरोसा अटूट: PM मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि UPSC की 100 वर्षों की यात्रा केवल एक संस्थान की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे की भी कहानी है, जो देश के करोड़ों लोगों ने आयोग पर जताया है. उन्होंने बताया कि आयोग ने कई पीढ़ियों के लोक सेवकों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इन अधिकारियों ने दशकों से देश की विकास यात्रा और प्रशासनिक व्यवस्था में योगदान दिया है.

प्रधानमंत्री ने आयोग की योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया और निष्पक्षता के महत्व को भी रेखांकित किया. उनके संबोधन में यह बात प्रमुख रही कि तकनीक, सरकार की कार्यप्रणाली और परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के बावजूद संस्थान के प्रति लोगों का भरोसा महत्वपूर्ण बना हुआ है.

PM मोदी ने जारी किया स्मारक सिक्का और डाक टिकट
UPSC के शताब्दी समारोह को यादगार बनाने के लिए प्रधानमंत्री ने एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया. इसके साथ ही उन्होंने ‘100 Landmark Judgements – Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया.

यह पुस्तक UPSC और देश के लोक सेवा आयोगों की नीतियों को प्रभावित करने वाले 100 महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों पर केंद्रित है. ये पहल आयोग की ऐतिहासिक यात्रा और भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में उसकी भूमिका को दर्ज करने के उद्देश्य से की गई हैं.

1926 में हुई थी UPSC की स्थापना
UPSC की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को पब्लिक सर्विस कमीशन के रूप में हुई थी. आजादी के बाद देश की संवैधानिक व्यवस्था में इसकी भूमिका को स्थापित किया गया और इसे संघ लोक सेवा आयोग के रूप में जाना जाने लगा. आयोग केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं और पदों के लिए भर्ती परीक्षाओं व चयन प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

शताब्दी समारोह का आयोजन 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को किया गया. पहले दिन ‘शताब्दी समारोह-मंथन’ के तहत लोक सेवाओं के भविष्य, प्रशासन में नवाचार और संस्थागत मूल्यों पर चर्चा हुई. UPSC अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने आयोग की आगे की यात्रा के लिए Trust, Transparency और Technology को प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धांत बताया.

UPSC के सामने भविष्य की चुनौतियां
शताब्दी समारोह में आयोग की उपलब्धियों के साथ भविष्य की प्रशासनिक जरूरतों पर भी ध्यान दिया गया. बदलती तकनीक, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और योग्य उम्मीदवारों के चयन जैसे विषय लोक सेवा आयोगों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं. UPSC के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह कार्यक्रम आयोग की अब तक की यात्रा और आने वाले समय की प्राथमिकताओं को सामने लाने का अवसर बना.

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