Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए 1 अगस्त का दिन बेहद यादगार रहा. हरियाणा की दो युवा महिला मुक्केबाज प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किए. दोनों खिलाड़ियों ने कुछ ही मिनटों के अंतराल में गोल्ड जीतकर न केवल भारत का गौरव बढ़ाया, बल्कि हरियाणा को एक बार फिर भारतीय मुक्केबाजी की सबसे मजबूत धरती साबित कर दिया.
प्रीति पवार ने 54 किलोग्राम वर्ग में दिखाया दम
सबसे पहले महिला 54 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में हरियाणा के भिवानी की प्रीति पवार रिंग में उतरीं. उन्होंने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो के खिलाफ शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया. तेज फुटवर्क, सटीक पंच और बेहतरीन डिफेंस के दम पर प्रीति ने मुकाबले पर पूरा नियंत्रण बनाए रखा. अंत में जजों ने सर्वसम्मति से 5-0 के फैसले के साथ उन्हें विजेता घोषित किया और भारत की झोली में बॉक्सिंग का पहला स्वर्ण पदक डाल दिया.
जैस्मिन लंबोरिया ने भी बरकरार रखी जीत की लय
प्रीति की जीत के कुछ ही समय बाद महिला 57 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जैस्मिन लंबोरिया ने नॉर्दर्न आयरलैंड की अनुभवी मुक्केबाज मिकेला वॉल्श का सामना किया. पहले राउंड से ही जैस्मिन ने संयम और आक्रामकता का शानदार संतुलन दिखाया. दूसरे और तीसरे राउंड में उन्होंने मुकाबले पर पूरी पकड़ बना ली. आखिर में पांचों जजों ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए 5-0 से विजेता घोषित किया. इस जीत के साथ भारत को बॉक्सिंग में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक मिला.
भिवानी ने फिर साबित की अपनी पहचान
हरियाणा का भिवानी जिला लंबे समय से भारतीय बॉक्सिंग की नर्सरी माना जाता है. देश को विजेंदर सिंह, अखिल कुमार और कई अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज देने वाला यह जिला अब प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया जैसी नई पीढ़ी की चैंपियन खिलाड़ियों के कारण फिर चर्चा में है. दोनों खिलाड़ियों की सफलता ने राज्य की खेल संस्कृति और मजबूत प्रशिक्षण व्यवस्था को नई पहचान दिलाई है.
भारत की पदक तालिका को मिली मजबूती
दोनों स्वर्ण पदकों ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के अभियान को नई ऊर्जा दी है. महिला मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन से भारतीय दल का आत्मविश्वास भी बढ़ा है. खेल विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों की यह सफलता भविष्य में विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए भी सकारात्मक संकेत है.
युवा खिलाड़ियों के लिए बनीं प्रेरणा
प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया की यह उपलब्धि केवल दो स्वर्ण पदकों तक सीमित नहीं है. यह उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. हरियाणा की इन दोनों बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर विश्व स्तर पर भारत का तिरंगा बुलंद किया जा सकता है. उनकी इस ऐतिहासिक सफलता ने पूरे देश में खुशी और गर्व का माहौल बना दिया है.
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