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Birth Certificate Rules: अब 2 साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट का आदेश जरूरी, संसद ने पास किया नया कानून

Registration of Births and Deaths Amendment Bill 2026: जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नियमों को और सख्त बनाने की दिशा में संसद ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है. 4 अगस्त 2026 तक यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों से मंजूरी प्राप्त कर चुका है. नए प्रावधान का उद्देश्य फर्जी तरीके से जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की आशंका को कम करना और समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना है.

2 साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट का आदेश जरूरी होगा
नए कानून के तहत यदि किसी बच्चे के जन्म का पंजीकरण घटना के दो वर्ष या उससे अधिक समय बाद कराया जाता है, तो अब केवल प्रशासनिक अधिकारी की अनुमति पर्याप्त नहीं होगी. ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश के बाद ही जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराया जा सकेगा. इसका मकसद दस्तावेजों के दुरुपयोग को रोकना और प्रत्येक मामले की न्यायिक जांच सुनिश्चित करना है.

पहले क्या था नियम?
अब तक लागू व्यवस्था में एक वर्ष से अधिक देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण कराया जा सकता था. संशोधन के बाद सरकार ने दो वर्ष से अधिक की देरी वाले मामलों के लिए प्रक्रिया को और कठोर बना दिया है. इससे लंबे समय बाद किए जाने वाले पंजीकरणों की स्वतंत्र जांच संभव होगी और फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

एक वर्ष तक की पंजीकरण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक वर्ष तक की पंजीकरण व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पहले की तरह जन्म या मृत्यु की सूचना 21 दिनों के भीतर देने पर सामान्य प्रक्रिया के तहत पंजीकरण किया जाएगा. यदि 21 दिनों के बाद, लेकिन एक वर्ष के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी.

सरकार ने क्यों किया कानून में बदलाव?
सरकार का कहना है कि जन्म प्रमाणपत्र किसी भी व्यक्ति की पहली कानूनी पहचान होता है. इसी दस्तावेज के आधार पर भविष्य में स्कूल में प्रवेश, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और अन्य कई सरकारी प्रक्रियाओं में पहचान स्थापित होती है. ऐसे में, वर्षों बाद बिना पर्याप्त जांच के पंजीकरण होने से फर्जीवाड़े की आशंका बनी रहती है. नए संशोधन का उद्देश्य समय पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करना और नागरिक पंजीकरण प्रणाली को अधिक विश्वसनीय बनाना है.

आम लोगों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश परिवारों पर इस बदलाव का कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि जन्म के तुरंत बाद या निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण कराने वालों के लिए प्रक्रिया पहले की तरह ही रहेगी. हालांकि जिन मामलों में दो वर्ष या उससे अधिक की देरी होगी, उन्हें अब न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है. इसलिए अभिभावकों को सलाह दी जा रही है कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद या निर्धारित समय सीमा के भीतर ही जन्म प्रमाणपत्र बनवा लें, ताकि भविष्य में किसी कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े.

डिजिटल रिकॉर्ड को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार लगातार जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को डिजिटल बनाने पर जोर दे रही है. हाल के वर्षों में डिजिटल डेटाबेस और एकीकृत नागरिक पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत किया गया है. नए संशोधन के बाद उम्मीद है कि समय पर ऑनलाइन पंजीकरण को और बढ़ावा मिलेगा व रिकॉर्ड की पारदर्शिता और विश्वसनीयता में सुधार होगा. साथ ही, विलंबित पंजीकरण के मामलों में न्यायिक निगरानी से फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.

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