Homeनेशनलस्कूल यूनिफॉर्म में हिजाब नहीं! इलाहाबाद HC ने छात्रा की याचिका क्यों...

स्कूल यूनिफॉर्म में हिजाब नहीं! इलाहाबाद HC ने छात्रा की याचिका क्यों खारिज की?

Allahabad High Court Hijab Verdict 2026: स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब या सिर पर स्कार्फ पहनने की अनुमति मांगने वाली एक नाबालिग छात्रा की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है. अदालत ने कहा कि यदि किसी शैक्षणिक संस्थान का ड्रेस कोड समान, गैर-भेदभावपूर्ण और अनुशासन व संस्थागत पहचान बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है, तो छात्र उस यूनिफॉर्म में अपनी ओर से अतिरिक्त परिधान जोड़ने पर जोर नहीं दे सकता.

प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल से जुड़ा मामला
यह मामला प्रयागराज के अतरसुइया स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा सुकैना रिजवी से जुड़ा है. छात्रा ने कक्षा 6 से 10 तक इसी स्कूल में पढ़ाई की थी और उसका कहना था कि वह इस दौरान स्कूल यूनिफॉर्म के साथ सिर पर स्कार्फ पहनती रही, जिस पर पहले स्कूल ने आपत्ति नहीं की थी.

कक्षा 11 में प्रवेश के समय स्कूल ने निर्धारित ड्रेस कोड का हवाला देते हुए स्कार्फ के साथ प्रवेश देने पर आपत्ति जताई. इसके बाद छात्रा ने हाईकोर्ट का रुख किया और यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ पहनने की अनुमति मांगी.

कोर्ट ने यूनिफॉर्म को क्यों माना जरूरी?
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने 21 अगस्त 2026 को स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हेडस्कार्फ/हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली छात्रा की याचिका खारिज कर दी थी. अब इस फैसले की विस्तृत जानकारी 24–25 अगस्त को सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है. अदालत ने कहा कि यूनिफॉर्म का उद्देश्य केवल कपड़ों में एकरूपता लाना नहीं है, बल्कि इससे अनुशासन, छात्रों के बीच समानता और संस्थान की पहचान भी कायम होती है.

कोर्ट के मुताबिक, जब ड्रेस कोड सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होता है और उसमें किसी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता, तो स्कूल प्रशासन को अपनी निर्धारित यूनिफॉर्म नीति लागू करने का अधिकार है. इससे स्कूल में अलग-अलग धार्मिक पहचान के आधार पर भिन्नता कम करने और धर्म-निरपेक्ष वातावरण बनाए रखने में मदद मिलती है.

हिजाब को जरूरी धार्मिक प्रथा साबित नहीं कर पाई छात्रा
छात्रा की ओर से दलील दी गई थी कि स्कार्फ पहनना उसके धार्मिक विश्वास का हिस्सा है और इसे रोकना संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में ऐसा पर्याप्त तथ्य या प्रामाणिक धार्मिक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि कक्षा में हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा है.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले स्कूल द्वारा स्कार्फ पहनने पर आपत्ति नहीं जताने से छात्रा को भविष्य में यूनिफॉर्म नीति में छूट पाने का स्थायी कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता.

सुप्रीम कोर्ट में अभी अंतिम फैसला नहीं
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि हिजाब को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से अभी ऐसा अंतिम और सर्वमान्य फैसला नहीं आया है, जो इस पूरे विवाद को निर्णायक रूप से समाप्त कर दे. कर्नाटक हाईकोर्ट के 2022 के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण और प्रभावशाली न्यायिक दृष्टांत माना, जबकि सुप्रीम कोर्ट में संबंधित मामले में पहले मतभेद वाला फैसला आया था.

इसलिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला इस विशेष मामले और स्कूल की यूनिफॉर्म नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है. इसे देश के हर स्कूल में हिजाब पर स्वतः लागू होने वाला एक समान राष्ट्रीय प्रतिबंध समझना सही नहीं होगा.

यह भी पढ़ें- ‘स्कूल ठीक करने’ निकले थे, गांव वालों ने CJP की ही लगा दी क्लास! जमीन पर गिराकर पीटा, जयपुर में बवाल

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments