CJP Election Survey: देश में हाल के Gen-Z आंदोलनों के बाद युवाओं की राजनीति, रोजगार और शिक्षा से जुड़ी प्राथमिकताओं पर चर्चा तेज है. इसी बीच, 27 अगस्त 2026 को जारी इंडिया टुडे और C-Voter के ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) सर्वे में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर युवाओं और आम लोगों की राय सामने आई है. सर्वे के नतीजे बताते हैं कि CJP को लेकर दिलचस्पी जरूर बढ़ी है, लेकिन चुनावी राजनीति में उतरने के सवाल पर समर्थन अभी एकतरफा नहीं है.
CJP चुनाव लड़े तो कितने लोग देंगे वोट?
सर्वे में लोगों से सीधा सवाल किया गया कि अगर CJP चुनाव लड़ती है तो क्या वे उसे वोट देंगे? इसके जवाब में 33 फीसदी लोगों ने कहा कि वे CJP को वोट देंगे. वहीं 43 फीसदी ने साफ तौर पर कहा कि वे उसे वोट नहीं देंगे. शेष लोगों की राय स्पष्ट नहीं थी या उन्होंने कोई निश्चित पक्ष नहीं चुना.
इन आंकड़ों से यह संकेत मिलता है कि CJP को लेकर एक वर्ग में समर्थन मौजूद है, लेकिन फिलहाल उसका दायरा इतना व्यापक नहीं दिखता कि उसे स्पष्ट चुनावी बढ़त कहा जा सके. सर्वे केवल उस समय की जनभावना को दर्शाता है और इसे किसी वास्तविक चुनाव के नतीजे के रूप में नहीं देखा जा सकता.
चुनाव लड़ने के पक्ष में कितने लोग?
MOTN सर्वे में यह भी पूछा गया कि CJP को केवल एक प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करना चाहिए या फिर चुनावी राजनीति में उतरना चाहिए. इस सवाल पर 39 फीसदी लोगों ने कहा कि CJP को प्रेशर ग्रुप के तौर पर ही बने रहना चाहिए. दूसरी ओर, 26 फीसदी लोगों ने इसके चुनाव लड़ने का समर्थन किया.
यानी सर्वे में चुनावी राजनीति में उतरने के मुकाबले CJP के दबाव समूह के रूप में काम करने के पक्ष में ज्यादा लोग दिखाई दिए. इससे यह तस्वीर उभरती है कि आंदोलन या मुद्दों पर दबाव बनाने की भूमिका को लेकर संगठन की स्वीकार्यता और चुनाव लड़ने की स्वीकार्यता में अंतर है.
Gen-Z का सबसे बड़ा मुद्दा क्या निकला?
सर्वे का सबसे अहम हिस्सा युवाओं की प्राथमिकताओं से जुड़ा रहा. जब Gen-Z से पूछा गया कि मौजूदा समय में उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा क्या है, तो 53 फीसदी युवाओं ने नौकरी या रोजगार को सबसे बड़ी चिंता बताया. इसके बाद 22 फीसदी ने शिक्षा को प्राथमिकता दी.
रहन-सहन का बढ़ता खर्च 12 फीसदी युवाओं के लिए प्रमुख मुद्दा रहा, जबकि 4 फीसदी ने मानसिक स्वास्थ्य को सबसे अहम चिंता बताया. इन आंकड़ों से साफ है कि रोजगार का सवाल Gen-Z की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है और शिक्षा भी उनके लिए एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है.
रोजगार की जिम्मेदारी किसकी?
सर्वे में युवाओं से यह भी पूछा गया कि उन्हें रोजगार योग्य बनाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी किसकी है. 63 फीसदी युवाओं ने केंद्र और राज्य सरकारों को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना. 14 फीसदी ने स्कूल और कॉलेज, 9 फीसदी ने निजी नियोक्ताओं व 5 फीसदी ने परिवार और आम लोगों को जिम्मेदार बताया.
कुल मिलाकर, C-Voter के ताजा सर्वे का संदेश साफ है- Gen-Z के लिए राजनीति में सबसे बड़ी प्राथमिकता रोजगार है. CJP को लेकर उत्सुकता जरूर है, लेकिन चुनावी समर्थन के मामले में उसे अभी लंबा रास्ता तय करना पड़ सकता है.
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