Rahul Gandhi Dalit Remark: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के चाय की दुकानों पर दलितों के साथ कथित भेदभाव के ‘दो कप’ वाले बयान को लेकर विवाद बढ़ गया है. राहुल गांधी ने हाल में दावा किया था कि कुछ चाय की दुकानों पर दलितों को अलग कप में चाय दी जाती है, जबकि दूसरे ग्राहकों के लिए अलग कप इस्तेमाल किए जाते हैं. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है.
अब उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और चंदौली के कुछ स्थानीय दुकानदारों और लोगों ने इस दावे को खारिज किया है. उन्होंने कहा कि उनके यहां ग्राहक की जाति पूछकर चाय नहीं परोसी जाती और सभी ग्राहकों के साथ समान व्यवहार किया जाता है.
‘जाति पूछकर चाय नहीं दी जाती’
महाराजगंज के नौतनवा इलाके में स्थानीय लोगों ने राहुल गांधी के दावे पर असहमति जताई. स्थानीय निवासी राजीव दुबे ने कहा कि वह रोज चाय की दुकान पर आते हैं और वहां सभी लोगों के साथ समान व्यवहार होता है.
एक अन्य स्थानीय व्यक्ति श्याम मधेशिया ने भी कहा कि नौतनवा बाईपास की चाय की दुकानों पर किसी से उसकी जाति पूछकर चाय नहीं दी जाती. उनके मुताबिक, सभी ग्राहकों को एक ही तरह से चाय परोसी जाती है.
चाय दुकानदार संजय मधेशिया ने भी दावा किया कि उनकी दुकान पर आने वाले किसी व्यक्ति की जाति नहीं पूछी जाती. उन्होंने कहा कि हर ग्राहक का सम्मान किया जाता है.
चंदौली के दुकानदार बोले- ‘ग्राहक देवता समान’
चंदौली में भी कुछ दुकानदारों ने राहुल गांधी के ‘दो तरह के कप’ वाले दावे को गलत बताया. दुकानदार शारदानंद मिश्रा ने कहा कि दुकान पर आने वाले ग्राहकों के बीच जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता. उन्होंने ग्राहकों को ‘देवता समान’ बताया.
दुकानदार दीपक कुमार रतवानी ने भी कहा कि उनके लिए दलित, पिछड़ा या सामान्य वर्ग का कोई अलग-अलग व्यवहार नहीं है. उनके मुताबिक, ग्राहक जिस कप में चाय पीते हैं, उसी तरह वह भी चाय पीते हैं.
क्या राहुल गांधी का दावा पूरी तरह गलत साबित होता है?
यहां तथ्य को सावधानी से समझना जरूरी है. महाराजगंज और चंदौली के कुछ दुकानदारों का बयान केवल उनके इलाके और दुकानों की स्थिति के बारे में है. इससे पूरे देश की सभी चाय दुकानों के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.
वहीं, भारत में जाति आधारित ‘दो गिलास’ या ‘दो कप’ जैसी भेदभावपूर्ण प्रथाओं के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं. इसलिए किसी एक इलाके के दुकानदारों के बयान को पूरे देश पर लागू करना भी उचित नहीं होगा.
बयान से फिर गर्म हुई सियासत
राहुल गांधी का ‘दो कप’ वाला बयान ऐसे समय आया है, जब दलित सम्मान और कथित जातिगत भेदभाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव पहले से तेज है. हालिया हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद में भी राहुल गांधी ने इसे छुआछूत से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की है. भाजपा ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए उन पर समाज में विभाजन पैदा करने का आरोप लगाया है.
फिलहाल ‘दो कप’ के दावे पर महाराजगंज और चंदौली के स्थानीय दुकानदारों का स्पष्ट इनकार सामने आया है. ऐसे में, इस मुद्दे पर किसी व्यापक निष्कर्ष से पहले स्थानीय स्तर पर स्वतंत्र और ठोस सत्यापन जरूरी है.
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