Haldwani Purification Controversy: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा को पत्र लिखकर इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. खरगे ने कहा है कि घटना के 24 दिन बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार लोगों और संगठनों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई है.
खरगे ने 2 सितंबर को लिखे पत्र में इस बात पर हैरानी जताई कि उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन की ओर से अब तक कथित शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया. यह पत्र ऐसे समय आया है, जब इसी विवाद से जुड़े बयानों के मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ पहले ही हल्द्वानी में FIR दर्ज हो चुकी है.
’24 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, मैं हैरान हूं’
खरगे ने अपने पत्र में कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में उनकी जनसभा के बाद कथित तौर पर शुद्धिकरण की प्रक्रिया अपनाई गई. कांग्रेस इसे सामाजिक भेदभाव और अस्पृश्यता की मानसिकता से जुड़ा मामला बता रही है.
खरगे के अनुसार, घटना के इतने दिन बाद भी आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज न होना गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने नड्डा से आग्रह किया कि वह उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दें. कांग्रेस अध्यक्ष ने इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत अपमान का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा बताया है.
आखिर क्या है हल्द्वानी का पूरा विवाद?
यह विवाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक जनसभा के बाद शुरू हुआ था. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद वहां कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया गया. कांग्रेस ने इसे लेकर तीखी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे भेदभावपूर्ण सोच है.
राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई नेताओं ने इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की. राहुल गांधी ने कथित शुद्धिकरण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की थी.
राहुल गांधी पर FIR ने बढ़ाया राजनीतिक विवाद
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में FIR दर्ज की गई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी ने कथित शुद्धिकरण की घटना को जातिगत रंग देकर सामाजिक और जातीय भावनाओं को ठेस पहुंचाई. रिपोर्टों के मुताबिक, FIR भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धारा के तहत दर्ज की गई है. राहुल गांधी और कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं.
खरगे की चिट्ठी से फिर तेज हुआ सियासी संग्राम
खरगे की नई चिट्ठी ने भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है. कांग्रेस का सवाल है कि जब राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है, तो कथित शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
फिलहाल, 3 सितंबर 2026 तक यह मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का केंद्र बना हुआ है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि खरगे की मांग के बाद उत्तराखंड सरकार और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है.
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