Delhi Protest Latest News 2026: राजधानी दिल्ली में हालिया विरोध-प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और कथित फर्जी वीडियो प्रसारित किए जाने का मामला सामने आया है. दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने गलत जानकारी फैलाने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ चार FIR दर्ज की हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया अकाउंट भी जांच के दायरे में हैं. अब तक करीब 500 पोस्ट हटाए जाने की जानकारी सामने आई है.
प्रदर्शनों के बीच सक्रिय हुए संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट
13 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर कई भ्रामक दावे किए गए. पुलिस और खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, कुछ अकाउंट्स के पाकिस्तान या विदेश से संचालित होने की आशंका है. इनकी गतिविधियों और पोस्ट की सामग्री की जांच की जा रही है.
मौतों और पुलिस कार्रवाई को लेकर फैलाई गई अफवाहें
रिपोर्टों के मुताबिक, 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर कई लोगों की मौत होने का दावा किया गया था. बाद में यह दावा भ्रामक बताया गया. इसके अलावा, सोमवार को विपक्षी नेताओं के मार्च के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के घायल होने और पुलिस की ओर से गोलीबारी किए जाने से जुड़ा कथित फर्जी दावा भी प्रसारित हुआ.
इन पोस्ट की वास्तविकता, उन्हें प्रसारित करने वाले अकाउंट्स और उनके पीछे मौजूद लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है. ऐसे दावों को साझा करने से पहले उनकी पुष्टि करना जरूरी है.
4 FIR, सैकड़ों पोस्ट हटाने की कार्रवाई
दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने कथित तौर पर गलत नैरेटिव फैलाने और सार्वजनिक माहौल बिगाड़ने वाले सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ चार FIR दर्ज की हैं. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 500 पोस्ट हटवाए गए हैं. हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में हटाई गई पोस्ट की संख्या अलग बताई गई है.
सोशल मीडिया यूजर्स के लिए क्या है जरूरी?
प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो को बिना सत्यापन साझा करना अफवाहों को बढ़ा सकता है. यूजर्स को पुलिस, चुनाव आयोग और अन्य आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए. किसी अकाउंट के पाकिस्तान से संचालित होने या किसी एजेंसी से जुड़े होने के दावे को भी जांच पूरी होने से पहले अंतिम निष्कर्ष नहीं मानना चाहिए.
फिलहाल, इस मामले में जांच जारी है. पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य कथित भ्रामक सामग्री के प्रसार और उससे पैदा होने वाली सार्वजनिक अशांति को रोकना है.
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