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महिला आरक्षण बिल को मिला जमीनी समर्थन, यूपी-बिहार से कश्मीर तक गूंज

Women Reservation Bill India: देशभर की महिलाओं ने महिला आरक्षण बिल पर संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र का स्वागत किया है. यूपी, बिहार से लेकर जम्मू-कश्मीर तक की महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि इस बिल से आधी आबादी की राजनीति में भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे.

यूपी के मिर्जापुर की समाज सेविका उन्नति बरनवाल ने इसे प्रधानमंत्री का स्वागत योग्य कदम बताया. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर संसद में लंबे समय से चर्चा हो रही थी और अब इसके लागू होने की दिशा में कदम बढ़ना सकारात्मक है. इसे चुनावी नजरिये से नहीं, बल्कि महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी के रूप में देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, संसद में महिलाओं की संख्या बढ़ने से जनहित के मुद्दे अधिक प्रभावी ढ़ंग से उठाए जा सकेंगे.

बिहार के मुजफ्फरपुर की भाजपा नेता ममता रानी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल महिलाओं के हित में है और विपक्ष को भी इसका समर्थन करना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक विपक्ष इस मुद्दे पर केवल दावे करता रहा है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सीटों में बढ़ोतरी हो, जिससे ज्यादा महिलाओं को संसद और विधानसभा तक पहुंचने का अवसर मिल सके.

मोनालिसा राय ने कहा कि भाजपा हमेशा से महिला सशक्तिकरण के पक्ष में रही है और नारी शक्ति को मजबूत करने के लिए काम करती रही है. उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष इस बिल का समर्थन नहीं करता है, तो यह उनकी राजनीतिक सोच को दर्शाता है.

जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष दरख्शां अंद्राबी ने भी इस विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की सराहना की. उन्होंने कहा कि संसद में बुलाए गए विशेष सत्र में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने पर चर्चा होगी, जो एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है. उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री मोदी अपने वादों को पूरा करेंगे और 2029 तक महिलाएं कानून निर्माण में बड़ी भूमिका निभाती नजर आएंगी.

अंद्राबी ने यह भी कहा कि आज महिलाएं शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं. 2014 से 2026 तक के समय को देखते हुए देश लगातार प्रगति की ओर बढ़ रहा है, जिसमें महिलाओं की भूमिका और भी मजबूत हुई है.

यह भी पढ़ें- परिसीमन की आहट: लोकसभा-विधानसभा सीटें बढ़ाने पर बहस तेज, आखिर क्या है पूरा मामला?

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