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असम-केरल-पुडुचेरी में मतदान संपन्न, अब 4 मई को खुलेगा सत्ता का पिटारा

Assembly Elections 2026: देश के तीन अहम राज्यों- असम, केरल (केरलम) और पुडुचेरी में गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को मतदान संपन्न हो गया. यह चुनाव सिर्फ इन राज्यों की सत्ता ही तय नहीं करेगा, बल्कि इसके नतीजों का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है. तीनों राज्यों में कुल मिलाकर 5 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र थे.

असम में 30 घायल, पुडुचेरी में कांग्रेस-भाजपा समर्थकों में झड़प
असम में मतदान के दौरान कुछ स्थानों पर चुनावी हिंसा की खबर सामने आई है, जिसमें करीब 30 लोगों के घायल होने की सूचना है. वहीं, पुडुचेरी के मन्नादिपेट क्षेत्र में एक पोलिंग बूथ पर कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच तीखी झड़प हो गई. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया.

कितनी सीटों पर हुआ मतदान?
इस चरण में असम की 126 सीटों, केरल की 140 सीटों और पुडुचेरी की 30 सीटों पर मतदान कराया गया. चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और वाम दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला. सभी की नजरें अब 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं.

राज्यवार मतदान प्रतिशत 
असम: 85.38%
केरल: 78.03%
पुडुचेरी: 89.83%

उच्च मतदान प्रतिशत यह संकेत देता है कि जनता ने बढ़-चढ़कर लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लिया.

किस राज्य में किसकी अग्निपरीक्षा?
असम में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है. केरल में वाम मोर्चा एक बार फिर वापसी के इरादे से मैदान में है. जबकि पुडुचेरी में एनडीए और कांग्रेस गठबंधन के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है.

वोटर्स में जबरदस्त उत्साह
सुबह से ही कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं. युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में वोट डालने पहुंचे. भारत निर्वाचन आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी. संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त केंद्रीय बल भी तैनात किए गए.

पुडुचेरी में दिखी टेक्नोलॉजी की झलक
पुडुचेरी के एक मतदान केंद्र पर “नीला” नाम की रोबोट मतदाताओं का स्वागत करती नजर आई. इस अनोखी पहल ने लोगों का ध्यान खींचा और यह दिखाया कि चुनाव प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग किस तरह बढ़ रहा है.

क्यों अहम हैं ये चुनाव?
इन चुनावों को 2026 के बड़े राजनीतिक समीकरण तय करने वाला माना जा रहा है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा नए राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करेगी या विपक्ष और क्षेत्रीय दल अपनी स्थिति बनाए रखेंगे?

नतीजों का इंतजार
अब सबकी निगाहें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं. इन्हीं नतीजों से तय होगा कि इन राज्यों में अगली सरकार किसकी बनेगी और देश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी.

यह भी पढ़ें- महिला आरक्षण बिल को मिला जमीनी समर्थन, यूपी-बिहार से कश्मीर तक गूंज

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