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घर में रखे सोने पर कर्ज लेने के लिए टूट पड़े लोग, गोल्ड लोन में 70% का उछाल, जानिए क्या है बड़ी वजह?

Gold Loan Boom: देश में गोल्ड लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) द्वारा दिए गए गोल्ड लोन में मई 2026 तक सालाना आधार पर करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो सभी प्रमुख ऋण श्रेणियों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है. इससे साफ है कि नकदी की जरूरत पड़ने पर लोग अब घर में रखे सोने को गिरवी रखकर कर्ज लेना अधिक पसंद कर रहे हैं.

रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची गोल्ड लोन की मांग
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 तक एनबीएफसी का गोल्ड ज्वेलरी लोन पोर्टफोलियो लगभग 3.29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. पिछले वर्ष की तुलना में इसमें लगभग 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरों में भी बड़ी संख्या में लोग गोल्ड लोन का विकल्प चुन रहे हैं.

आखिर लोग गोल्ड लोन की ओर क्यों बढ़ रहे हैं?
गोल्ड लोन की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे कई अहम कारण हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. जब सोने का मूल्य बढ़ता है तो उसी मात्रा के सोने पर पहले की तुलना में अधिक कर्ज मिल जाता है.

गोल्ड लोन की प्रक्रिया बेहद आसान और तेज होती है. इसमें लंबी आय जांच, भारी दस्तावेज या जटिल सत्यापन की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है, क्योंकि बैंक या वित्तीय संस्था के पास सोना सुरक्षा (Collateral) के रूप में रहता है.

कई मामलों में गोल्ड लोन की ब्याज दरें असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan) या क्रेडिट कार्ड के मुकाबले कम होती हैं, जिससे यह किफायती विकल्प बन जाता है.

RBI के नए नियमों का भी पड़ा असर
अप्रैल 2026 से गोल्ड लोन के लिए संशोधित नियामकीय ढ़ांचा लागू किया गया है. छोटे कर्ज लेने वालों के लिए Loan-to-Value (LTV) सीमा पहले की तुलना में अधिक लचीली बनाई गई है. उदाहरण के लिए, 2.5 लाख रुपये तक के कुछ गोल्ड लोन पर अधिकतम 85 प्रतिशत तक LTV की अनुमति दी गई है, जबकि बड़े ऋणों के लिए अलग सीमा तय की गई है. साथ ही मूल्यांकन, नीलामी और पारदर्शिता से जुड़े नियम भी मानकीकृत किए गए हैं. इन बदलावों से कई उधारकर्ताओं के लिए गोल्ड लोन लेना और आसान हुआ है.

महंगाई और नकदी की जरूरत भी बड़ी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई, छोटे कारोबारों की कार्यशील पूंजी की जरूरत, कृषि गतिविधियां, शिक्षा और चिकित्सा जैसे खर्चों के लिए लोग तेजी से गोल्ड लोन ले रहे हैं. कई परिवार अपनी बचत या निवेश तोड़ने के बजाय अस्थायी जरूरतों के लिए सोना गिरवी रखना अधिक सुविधाजनक मान रहे हैं. इसके अलावा, गोल्ड लोन में समय से भुगतान करने पर गिरवी रखा गया सोना वापस मिल जाता है, इसलिए इसे कई लोग सुरक्षित विकल्प के रूप में देखते हैं.

बैंकों और NBFCs के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा
गोल्ड लोन की बढ़ती मांग को देखते हुए बैंक और एनबीएफसी दोनों इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रहे हैं. डिजिटल आवेदन, घर बैठे मूल्यांकन की सुविधा, त्वरित स्वीकृति और कम प्रोसेसिंग समय जैसी सेवाओं के कारण ग्राहकों को आकर्षित करने की होड़ बढ़ गई है.

हालांकि, ग्राहकों को केवल ब्याज दर देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए. प्रोसेसिंग फीस, नवीनीकरण शुल्क, भुगतान की शर्तें और डिफॉल्ट की स्थिति में नीलामी के नियम भी अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है.

गोल्ड लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
1. केवल RBI से विनियमित बैंक या NBFC से ही गोल्ड लोन लें.
2. ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों की तुलना जरूर करें.
3. समय पर किस्त या ब्याज जमा करें, ताकि नीलामी की स्थिति न बने.
4. लोन एग्रीमेंट और सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ें.
5. जरूरत से अधिक कर्ज लेने से बचें.

क्या आगे भी बनी रहेगी तेजी?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने की कीमतें मजबूत बनी रहती हैं और आर्थिक गतिविधियों में नकदी की मांग बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में भी गोल्ड लोन की मांग ऊंचे स्तर पर रह सकती है. हालांकि आरबीआई लगातार इस क्षेत्र पर नजर बनाए हुए है, ताकि तेजी के साथ जोखिम भी नियंत्रित रहे. आरबीआई ने अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में भी तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार पर निगरानी बनाए रखने की आवश्यकता जताई है.

सोना बना आर्थिक सुरक्षा कवच
देश में गोल्ड लोन अब केवल आपातकालीन जरूरत का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से लोकप्रिय वित्तीय उत्पाद बन चुका है. मई 2026 तक एनबीएफसी के गोल्ड लोन में करीब 70 प्रतिशत की सालाना वृद्धि इस बात का संकेत है कि लोग अपने घर में रखे सोने को जरूरत पड़ने पर आर्थिक संसाधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि किसी भी प्रकार का कर्ज लेने से पहले उसकी लागत, भुगतान क्षमता और शर्तों का सावधानीपूर्वक आकलन करना सबसे जरूरी है.

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