ARHC Scheme: महानगरों और बड़े शहरों में लगातार बढ़ते मकान किराए ने नौकरीपेशा लोगों, प्रवासी मजदूरों, छात्रों और निम्न आय वर्ग के परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. ऐसे समय में केंद्र सरकार की अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स (ARHC) योजना लाखों लोगों के लिए राहत का विकल्प बनकर सामने आई है. इस योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को उनके कार्यस्थल के नजदीक अपेक्षाकृत कम किराए पर रहने के लिए घर उपलब्ध कराए जाते हैं.
क्या है ARHC योजना?
अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स योजना को केंद्र सरकार ने शहरी क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों, गरीब परिवारों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए शुरू किया था. यह योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत संचालित की जाती है.
योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को सम्मानजनक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है जो रोजगार की तलाश में गांवों या छोटे शहरों से बड़े शहरों में आते हैं और महंगे किराए के कारण बेहतर आवास नहीं ले पाते.
किन लोगों को मिलता है योजना का लाभ?
सरकार ने इस योजना को विशेष रूप से निम्न आय वर्ग और शहरी गरीबों को ध्यान में रखकर तैयार किया है. इसके तहत प्रवासी मजदूर, निर्माण श्रमिक, रिक्शा चालक, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, घरेलू कामगार, फैक्ट्री कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के कर्मचारी और अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार लाभ उठा सकते हैं. कई राज्यों में छात्रों और कम आय वाले परिवारों को भी प्राथमिकता दी जाती है.
कैसे उपलब्ध कराए जाते हैं ये मकान?
ARHC योजना दो मॉडलों पर काम करती है. पहले मॉडल में सरकार द्वारा पहले से निर्मित लेकिन खाली पड़े आवासों को किराए के मकानों में बदला जाता है. दूसरे मॉडल में निजी कंपनियों, उद्योगों और संस्थाओं को प्रोत्साहित किया जाता है कि वे अपनी जमीन पर किराए के लिए आवासीय परिसर विकसित करें.
इन आवासों में एक कमरे वाले फ्लैट, छोटे परिवारों के लिए आवास और डॉर्मिटरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं. स्थानीय जरूरतों के अनुसार मकानों का आकार और व्यवस्था तय की जाती है.
किराया कैसे तय होता है?
योजना का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को सस्ता आवास उपलब्ध कराना है. इसलिए किराया स्थानीय प्रशासन, शहरी निकायों और परियोजना संचालकों द्वारा क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए निर्धारित किया जाता है. सामान्य बाजार किराए की तुलना में यह किराया अपेक्षाकृत कम रखने का प्रयास किया जाता है, ताकि निम्न आय वर्ग के लोग आसानी से इसका लाभ ले सकें.
मकान पाने के लिए क्या करना होगा?
योजना के तहत उपलब्ध मकानों की जानकारी संबंधित नगर निगम, विकास प्राधिकरण, राज्य आवास बोर्ड या परियोजना संचालकों के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है. इच्छुक व्यक्ति को पहचान पत्र, रोजगार या आय से जुड़े दस्तावेज व अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र जमा करने पड़ सकते हैं.
कई स्थानों पर आवंटन प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन, स्थानीय निकायों की सूची या पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है. यदि किसी परियोजना में मांग अधिक होती है तो प्राथमिकता नियमों के आधार पर पात्र लाभार्थियों का चयन किया जाता है.
क्यों बढ़ रही है इस योजना की अहमियत?
देश में तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण बड़े शहरों में किराए के मकानों की मांग लगातार बढ़ रही है. निजी बाजार में बढ़ते किराए के कारण कम आय वाले लोगों के लिए शहरों में रहना कठिन होता जा रहा है. ऐसे में, ARHC जैसी योजनाएं न केवल आवास उपलब्ध कराती हैं, बल्कि लोगों को उनके कार्यस्थल के नजदीक रहने का अवसर भी देती हैं, जिससे आने-जाने का खर्च और समय दोनों बचते हैं.
सरकार की बड़ी कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में किराए के आवास की मांग और बढ़ेगी. इसी वजह से सरकार सार्वजनिक और निजी भागीदारी के माध्यम से सस्ते रेंटल हाउसिंग नेटवर्क का विस्तार करने पर जोर दे रही है. ARHC योजना का उद्देश्य केवल मकान उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि शहरी गरीबों और प्रवासी कामगारों के जीवन स्तर में सुधार लाना भी है.
कम आय वर्ग के लिए राहत का विकल्प
यदि आप किसी शहर में नौकरी करते हैं, कम आय वर्ग से आते हैं या महंगे किराए की वजह से बेहतर आवास नहीं ले पा रहे हैं, तो ARHC योजना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है. सरकार की यह पहल उन लोगों को राहत देने का प्रयास है जो शहरों की अर्थव्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन आवास की समस्या से जूझते रहते हैं. योजना की उपलब्धता और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी अपने स्थानीय शहरी निकाय या आवास विभाग से प्राप्त की जा सकती है.
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