Mayawati Attacks Congress and SP: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि इन दलों ने सत्ता में रहते हुए एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के अधिकारों को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई, जबकि अब राजनीतिक लाभ के लिए इन वर्गों की चिंता जता रहे हैं. उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे “दोहरे चरित्र” वाली पार्टियों से सावधान रहें.
कांग्रेस पर ‘अवसरवाद’ का आरोप
शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए मायावती ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी के संवैधानिक अधिकारों को लेकर पार्टी का रवैया हमेशा ढ़ुलमुल रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण में भागीदारी की बात करने वाली कांग्रेस ने केंद्र में रहते हुए कभी भी इन वर्गों के आरक्षण कोटा को पूरा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए. उन्होंने कांग्रेस को “अवसरवादी” करार दिया.
मंडल कमीशन और 27% आरक्षण का मुद्दा
मायावती ने कहा कि ओबीसी के लिए मंडल कमीशन की सिफारिशों के अनुसार, 27 प्रतिशत आरक्षण भी कांग्रेस ने लागू नहीं किया था. यह कदम बाद में बसपा के प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार में लागू हुआ, जो सर्वविदित है.
सपा पर भी साधा निशाना
बसपा सुप्रीमो ने समाजवादी पार्टी पर भी हमला करते हुए कहा कि यूपी में पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने के लिए जुलाई 1994 में आई पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को सपा सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था. जबकि 3 जून 1995 को बनी बसपा सरकार ने इसे तुरंत लागू किया. उन्होंने कहा कि सपा का रवैया सत्ता में और विपक्ष में अलग-अलग रहता है.
छलावे से रहें सावधान
मायावती ने कहा कि सपा और कांग्रेस जैसे दल जब सत्ता में नहीं होते तो अलग रुख अपनाते हैं, लेकिन सत्ता में आते ही उनका व्यवहार संकीर्ण और जातिवादी हो जाता है. ऐसे में, इन वर्गों को “छलावे की राजनीति” से सावधान रहना होगा.
परिसीमन और जनगणना पर बयान
महिला आरक्षण लागू करने के सवाल पर मायावती ने कहा कि अगर इसे जल्द लागू करना है तो 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कांग्रेस आज केंद्र में होती, तो वह भी भाजपा की तरह यही कदम उठाती.
अपने पैरों पर खड़ा हो समाज
अंत में मायावती ने कहा कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के वास्तविक हितों को लेकर कोई भी पार्टी पूरी तरह गंभीर नहीं रही है. उन्होंने सलाह दी कि फिलहाल महिला आरक्षण के तहत जो मिल रहा है, उसे स्वीकार करें और भविष्य के लिए खुद को मजबूत बनाएं. उन्होंने जोर देकर कहा कि इन वर्गों को किसी के बहकावे में आए बिना आत्मनिर्भर बनना होगा, तभी उनका सामाजिक और राजनीतिक सशक्तिकरण संभव है.
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