Nepal Flood 2026: नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर अब काठमांडू और बीजिंग के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है. नेपाल में सवाल उठ रहे हैं कि तिब्बत की ओर से आई अचानक बाढ़ के बारे में समय रहते चेतावनी क्यों नहीं मिली. वहीं, चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि ऐसी बातें तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करती हैं और इस समय आरोप लगाने से किसी की मदद नहीं होगी.
नेपाल में चेतावनी को लेकर उठे गंभीर सवाल
26 अगस्त को रसुवागढ़ी-केरुंग सीमा क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने नेपाल के रसुवा समेत कई इलाकों में भारी तबाही मचाई. नेपाल के तकनीकी आकलन के मुताबिक, तिब्बत की तरफ से आया पानी भोटेकोशी नदी में पहुंचा और तेजी से नीचे की ओर बढ़ा. फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों को सुबह करीब 9:05 बजे तिब्बत की ओर से बड़ी बाढ़ आने की सूचना मिली.
नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ सीमा पार करने के बाद महज कुछ ही मिनटों में स्याफ्रुबेसी क्षेत्र तक पहुंच गई. नेपाल के अधिकारियों का कहना है कि सीमा पार करने से पहले पर्याप्त क्रॉस-बॉर्डर सूचना उपलब्ध नहीं होने के कारण शुरुआती चेतावनी में बड़ा अंतर रह गया.
चीन ने आरोपों को बताया गलत
चीन के नेपाल स्थित दूतावास ने 27 अगस्त को इन आरोपों को खारिज किया. दूतावास ने कहा कि चीन ने नेपाल को समय पर चेतावनी नहीं दी- यह दावा गलत और भ्रामक है. चीन ने उस दावे को भी नकार दिया कि उसकी तरफ किसी बांध या प्राकृतिक रूप से बने जलाशय के टूटने से नेपाल में यह तबाही हुई.
चीनी पक्ष के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह आए भूकंपीय झटके के बाद बर्फ का हिमस्खलन और बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिसने सीमा के दोनों ओर हालात बिगाड़ दिए. चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने भी प्रारंभिक जानकारी के आधार पर भूकंप को घटना से जोड़ने की बात कही है.
‘आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा’, राहत पर ध्यान देने की अपील
चीन ने कहा है कि मौजूदा मानवीय संकट के बीच एक-दूसरे पर दोष मढ़ने के बजाय बचाव और राहत कार्यों पर ध्यान दिया जाना चाहिए. हालांकि, घटना के कारण और चेतावनी व्यवस्था को लेकर नेपाल के तकनीकी आकलन व चीन के दावे के बीच अंतर साफ दिखाई दे रहा है.
इस बीच, तबाही का पैमाना लगातार सामने आ रहा है. 27 अगस्त की सुबह तक नेपाल में कम से कम 165 लोगों की मौत की खबर है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं. बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं और प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने का काम जारी है.
असली सवाल: क्या सीमा पार चेतावनी तंत्र मजबूत था?
इस घटना ने नेपाल और चीन के बीच आपदा संबंधी सूचनाओं के तत्काल आदान-प्रदान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि तबाही के लिए किसी एक पक्ष की लापरवाही जिम्मेदार थी. उपलब्ध रिपोर्टों से इतना जरूर स्पष्ट है कि बाढ़ बेहद तेजी से आगे बढ़ी और शुरुआती चेतावनी व सीमा-पार सूचना साझा करने की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं. ऐसे में, आगे की जांच और तकनीकी रिपोर्ट ही यह स्पष्ट कर पाएगी कि चेतावनी में वास्तविक चूक कहां हुई.
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