Homeबॉलीवुडपीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को घेरा, बोले- अब वो कौन से...

पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को घेरा, बोले- अब वो कौन से कुत्ते हैं, जिनके मुंह में हड्डी है?

Piyush Mishra vs Naseeruddin Shah: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सिर्फ राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे प्रदर्शन के बीच अभिनेता और रंगकर्मी पीयूष मिश्रा भी छात्रों के समर्थन में पहुंचे. यहां उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए बॉलीवुड की कथित चुप्पी पर सवाल उठाया और अपने वरिष्ठ सहकर्मी नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान का हवाला दिया.

नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान का जिक्र
दरअसल, दिल्ली में CJP छात्र प्रदर्शन के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने फिल्म इंडस्ट्री के उन लोगों पर टिप्पणी की थी, जो छात्र मुद्दों पर सार्वजनिक तौर पर बोलने से बच रहे थे. उन्होंने एक कहावत का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी होती है, वह भौंक नहीं सकता. उनका आशय यह था कि कुछ लोग अपने हितों या परिस्थितियों के कारण खुलकर बोलने से बचते हैं.

रांची में छात्रों को संबोधित करते हुए पीयूष मिश्रा ने इसी बयान को याद किया. उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के प्रति सम्मान जताते हुए सवाल किया कि अगर उस समय कुछ लोगों की चुप्पी को ‘हड्डी’ से जोड़ा गया था, तो आज झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर चुप रहने वालों को लेकर क्या कहा जाएगा.

‘अब मुझे आपसे डर नहीं लगता’
पीयूष मिश्रा ने कहा कि वह नसीरुद्दीन शाह की इज्जत करते हैं, लेकिन अब उनसे सवाल पूछने में उन्हें डर नहीं लगता. उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि इस समय आखिर वे कौन लोग हैं, जिनके मुंह में हड्डी है और जो झारखंड के छात्रों के दर्द पर चुप बैठे हैं. उनके इस बयान का वीडियो और खबरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है.

‘पिज्जा-बर्गर नहीं, दाल-भात खाकर लड़ रहे छात्र’
पीयूष मिश्रा ने अपने संबोधन में दिल्ली-मुंबई के आंदोलनों और झारखंड के छात्रों के संघर्ष के बीच तुलना भी की. उन्होंने कहा कि यहां के छात्र कठिन परिस्थितियों में साधारण दाल-भात खाकर अपने भविष्य और रोजगार के सवाल पर आंदोलन कर रहे हैं. इसी संदर्भ में उन्होंने पिज्जा-बर्गर का जिक्र करते हुए आंदोलन की जमीन और परिस्थितियों के अंतर पर कटाक्ष किया. यह टिप्पणी अब फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों के रवैये और अलग-अलग आंदोलनों पर उनकी प्रतिक्रिया को लेकर बहस का हिस्सा बन गई है.

10 अगस्त को प्रदर्शन में बढ़ा तनाव
इस बीच, JPSC-JSSC आंदोलन ने 10 अगस्त को नया मोड़ लिया. छात्रों ने विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसके दौरान बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया. रिपोर्टों के मुताबिक, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया गया.

11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान
छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है. बीजेपी ने 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया है. वहीं, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को बातचीत और संवैधानिक तरीके से सुलझाने की बात कही है. दूसरी ओर, छात्रों की ओर से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जैसी मांगें लगातार उठाई जा रही हैं.

पीयूष मिश्रा के बयान ने इस आंदोलन को एक नया सामाजिक और फिल्मी आयाम जरूर दे दिया है. अब सवाल सिर्फ JPSC-JSSC की कथित अनियमितताओं का नहीं, बल्कि यह भी बन गया है कि छात्र आंदोलनों और युवाओं के मुद्दों पर सार्वजनिक हस्तियां कब और किस तरह अपनी आवाज उठाती हैं.

यह भी पढ़ें- रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च, बैरिकेड तोड़ने पर लाठीचार्ज; JPSC के पूर्व अध्यक्ष गिरफ्तार

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments