Parents Trapped in Government Job Scam: सरकारी नौकरी का सपना जितना बड़ा है, उसे बेचकर कमाई करने वाले ठगों का नेटवर्क भी उतनी ही तेजी से फैलता जा रहा है. बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ऐसे दलालों और ठगों का नेटवर्क तेजी से सक्रिय हो गया है, जो सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये ऐंठ रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि अब कुछ गिरोह बिना किसी आधिकारिक आवेदन या परीक्षा प्रक्रिया के ही जूनियर इंजीनियर (JE), शिक्षक, क्लर्क और SSC की नौकरियां दिलाने का दावा कर रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह गई है. दलाल आमने-सामने मुलाकात कर, फर्जी दफ्तर दिखाकर, नकली काउंसलिंग करवाकर और खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताकर अभ्यर्थियों व उनके अभिभावकों का भरोसा जीत रहे हैं. वहीं सोशल मीडिया, टेलीग्राम चैनल, व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी वेबसाइटों के जरिए भी बेरोजगार युवाओं को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जा रहा है.
नौकरी नहीं, उम्मीदों का कारोबार कर रहे हैं दलाल
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी कमजोरी उनकी उम्मीद होती है. ठग इसी उम्मीद का फायदा उठाते हैं. कई मामलों में युवाओं को बताया जाता है कि उनके “ऊपर तक संपर्क” हैं और वे बिना परीक्षा या इंटरव्यू के चयन करवा सकते हैं.
कुछ दलाल खुद को किसी विभाग का पूर्व अधिकारी, किसी मंत्री का करीबी या भर्ती बोर्ड से जुड़ा व्यक्ति बताकर भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं. शुरुआत में छोटी रकम ली जाती है और बाद में फाइल आगे बढ़ाने, मेडिकल कराने, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति पत्र जारी करवाने के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते हैं.
बिना फॉर्म भरे JE की नौकरी का दावा
हाल के दिनों में कई राज्यों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जहां युवाओं को यह कहकर फंसाया गया कि जूनियर इंजीनियर (JE) की भर्ती “अंदर से” हो रही है और आवेदन भरने की जरूरत नहीं है.
दलाल दावा करते हैं कि वे सीधे चयन सूची में नाम जुड़वा देंगे. कुछ मामलों में तो उम्मीदवारों को नकली चयन पत्र, फर्जी जॉइनिंग लेटर और बनावटी विभागीय दस्तावेज भी दिखाए जाते हैं. जब तक पीड़ित को सच्चाई का पता चलता है, तब तक लाखों रुपये ठगों के हाथों में पहुंच चुके होते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सरकारी भर्ती में आधिकारिक आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा और निर्धारित चयन प्रणाली को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यदि कोई व्यक्ति बिना फॉर्म भरे नौकरी दिलाने की बात कर रहा है, तो यह अपने आप में बड़ा चेतावनी संकेत है.
फर्जी काउंसलिंग का नया जाल
अब ठगों ने एक नया तरीका भी अपना लिया है. कई युवाओं को फोन कर बताया जाता है कि उनका चयन लगभग तय हो चुका है और उन्हें “काउंसलिंग प्रक्रिया” में शामिल होना होगा.
इसके बाद किसी होटल, निजी कार्यालय या किराए के हॉल में फर्जी काउंसलिंग आयोजित कर दी जाती है. वहां नकली अधिकारी बैठाए जाते हैं, दस्तावेज जमा कराए जाते हैं और उम्मीदवारों को विश्वास दिलाया जाता है कि उनकी नियुक्ति कुछ ही दिनों में हो जाएगी.
कई अभिभावक इस पूरे नाटक को देखकर भरोसा कर लेते हैं और बड़ी रकम देने के लिए तैयार हो जाते हैं. बाद में फोन नंबर बंद हो जाते हैं और कार्यालय गायब मिलते हैं.
SSC और शिक्षक भर्ती के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कई विशेषज्ञ मानते हैं कि SSC और शिक्षक भर्ती परीक्षाओं के नाम पर सबसे अधिक फ्रॉड सामने आते हैं. इसका कारण इन भर्तियों में बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का शामिल होना है.
दलाल अक्सर दावा करते हैं कि उनके पास “पेपर सेटिंग” की जानकारी है, मेरिट लिस्ट में नाम जुड़वा सकते हैं या इंटरव्यू में चयन सुनिश्चित करा सकते हैं. कुछ लोग तो फर्जी कटऑफ और नकली चयन सूची तक तैयार कर देते हैं.
युवाओं को यह समझना चाहिए कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में चयन का अधिकार केवल संबंधित आयोग या भर्ती संस्था के पास होता है. किसी निजी व्यक्ति के दावे पर भरोसा करना आर्थिक और कानूनी दोनों दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है.
सोशल मीडिया बना ठगों का सबसे बड़ा हथियार
पहले ऐसे गिरोह स्थानीय स्तर पर सक्रिय होते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया ने इनके लिए रास्ता आसान कर दिया है. फेसबुक पेज, इंस्टाग्राम अकाउंट, यूट्यूब चैनल और टेलीग्राम ग्रुप बनाकर हजारों युवाओं तक पहुंच बनाई जा रही है.
इन प्लेटफॉर्म पर फर्जी सफलता की कहानियां, नकली नियुक्ति पत्र और कथित चयनित उम्मीदवारों के वीडियो दिखाए जाते हैं. कई बार एआई तकनीक का उपयोग कर फर्जी ऑडियो और वीडियो भी तैयार किए जाते हैं, ताकि लोग आसानी से झांसे में आ जाएं. यही कारण है कि साइबर विशेषज्ञ लगातार युवाओं को ऑनलाइन भर्ती संबंधी दावों की जांच करने की सलाह दे रहे हैं.
पेरेंट्स क्यों हो रहे हैं सबसे ज्यादा शिकार?
कई बार अभ्यर्थी से ज्यादा उनके माता-पिता ठगी का शिकार बनते हैं. परिवार वर्षों से बच्चे की पढ़ाई और कोचिंग पर खर्च कर चुका होता है. जब कोई व्यक्ति नौकरी पक्की कराने का दावा करता है तो माता-पिता भावनात्मक दबाव में आ जाते हैं.
वे सोचते हैं कि यदि पैसे देकर बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो सकता है तो जोखिम लिया जा सकता है. ठग इसी मानसिकता का फायदा उठाते हैं और परिवारों से मोटी रकम वसूल लेते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी नौकरी कभी भी पैसे देकर नहीं खरीदी जा सकती. यदि कोई ऐसा दावा करता है तो उसके प्रति तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए.
ऐसे पहचानें नौकरी दिलाने वाले फर्जी गिरोह
यदि कोई व्यक्ति भर्ती निकलने से पहले चयन कराने का दावा करे, बिना आवेदन के नौकरी देने की बात करे, पैसे के बदले मेरिट में नाम जुड़वाने का आश्वासन दे या व्यक्तिगत खाते में रकम जमा कराने को कहे, तो सावधान हो जाना चाहिए.
इसके अलावा किसी होटल, निजी कमरे या गैर-सरकारी स्थान पर आयोजित काउंसलिंग भी संदेह का विषय हो सकती है. सभी सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की जानकारी संबंधित विभाग या आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होती है.
क्या पैसे देकर सरकारी नौकरी लग सकती है?
सरकारी नौकरियों में चयन निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के तहत होता है. आवेदन, परीक्षा, मेरिट, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति जैसी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है. कोई भी व्यक्ति कानूनी रूप से पैसे लेकर सरकारी नौकरी दिलाने की गारंटी नहीं दे सकता.
यदि कोई दलाल, एजेंट या स्वयंभू अधिकारी ऐसा दावा करता है, तो उसे संदेह की नजर से देखना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस या साइबर अपराध प्रकोष्ठ में शिकायत करनी चाहिए.
सरकारी भर्ती का कोई शॉर्टकट नहीं
सरकारी नौकरी का सपना लाखों युवाओं की मेहनत और संघर्ष से जुड़ा होता है. लेकिन इसी सपने को कुछ ठग अपना कारोबार बना चुके हैं. बिना फॉर्म भरवाए JE की नौकरी, फर्जी काउंसलिंग, SSC और शिक्षक भर्ती में चयन की गारंटी जैसे दावे सुनने में आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में यह धोखाधड़ी का हिस्सा होते हैं. इसलिए अभ्यर्थियों और अभिभावकों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है. याद रखिए, सरकारी नौकरी का सबसे सुरक्षित रास्ता केवल आधिकारिक भर्ती प्रक्रिया और अपनी मेहनत है, किसी दलाल का शॉर्टकट नहीं.
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