Homeराज्यराजस्थानगौसंरक्षण पर बड़ा सवाल! जैसलमेर में गायों की दर्दनाक मौत, डंपिंग यार्ड...

गौसंरक्षण पर बड़ा सवाल! जैसलमेर में गायों की दर्दनाक मौत, डंपिंग यार्ड की तस्वीरों ने देश को झकझोरा

Jaisalmer Cows Carcasses Case: राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर से सामने आई भयावह तस्वीरों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. जिले के अलग-अलग इलाकों और डंपिंग यार्ड में 500 से ज्यादा गायों के शव मिलने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था, पशुपालन विभाग और गौसंरक्षण दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में बड़ी संख्या में मृत गायों के अवशेष खुले में पड़े दिखाई दे रहे हैं, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है. ताजा जानकारी के अनुसार, यह मामला अब राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है और जांच तेज कर दी गई है.

कर्रा रोग बना मौत की बड़ी वजह
विशेषज्ञों और पशुपालन विभाग के शुरुआती आकलन में “कर्रा रोग” यानी बोटुलिज्म को गायों की मौत की मुख्य वजह माना जा रहा है. यह एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है, जो सड़े-गले पशुओं के अवशेषों और दूषित वातावरण से फैलती है. जैसे-जैसे राजस्थान में गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह संक्रमण तेजी से फैलने लगा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसलमेर के कई गांवों में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार गायों की मौत हो रही थी, लेकिन मामला तब सुर्खियों में आया जब डंपिंग यार्ड में बड़ी संख्या में शव दिखाई दिए.

पशु चिकित्सकों का कहना है कि यह बीमारी गायों के तंत्रिका तंत्र पर असर डालती है. संक्रमित पशु खाना-पीना बंद कर देते हैं, उनके पैर जकड़ जाते हैं और कुछ दिनों में उनकी मौत हो जाती है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि मृत पशुओं का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, तो बीमारी और तेजी से फैल सकती है.

शवों के निस्तारण पर उठे बड़े सवाल
स्थानीय लोगों और गौसेवा संगठनों का आरोप है कि प्रशासन ने मृत पशुओं के निस्तारण में भारी लापरवाही बरती. कई गांवों के पास खुले में शव फेंके गए, जिससे अन्य पशु भी संक्रमित होते चले गए. वायरल वीडियो में सैकड़ों हड्डियां और सड़े हुए शव दिखाई देने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर गौसंरक्षण के दावे जमीन पर क्यों नहीं दिखते.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते शवों को दफनाया या वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाता, तो इतनी बड़ी संख्या में मौतें नहीं होतीं. कई पशुपालकों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया.

पशु चिकित्सा व्यवस्था भी कटघरे में
इस घटना के बाद जिले की पशु चिकित्सा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसलमेर जिले के कई पशु चिकित्सा केंद्र या तो बंद हैं या वहां पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है. ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों को समय पर इलाज और दवाएं नहीं मिल पा रहीं. बताया जा रहा है कि कई पशु चिकित्सा केंद्रों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि दुधारू पशुओं में पोषक तत्वों की कमी भी बीमारी फैलने की एक बड़ी वजह बन रही है. मिनरल मिक्सचर और संतुलित आहार की कमी के कारण पशु संक्रमित अवशेषों को चाटने लगते हैं, जिससे संक्रमण बढ़ता है.

सरकार और प्रशासन हरकत में
मामला बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने विशेषज्ञों की टीम जैसलमेर भेजी है. जयपुर स्थित पशु चिकित्सा संस्थान के डॉक्टर प्रभावित गांवों से पानी, चारा और शवों के नमूने लेकर जांच कर रहे हैं. पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को सतर्क रहने और बीमार पशुओं को तुरंत अलग रखने की सलाह दी है.

पशुपालन मंत्री ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मृत पशुओं के निस्तारण की व्यवस्था तत्काल सुधारी जाए और प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमें भेजी जाएं. साथ ही गांवों में जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई है.

सोशल मीडिया से राजनीति तक गूंजा मामला
जैसलमेर की यह घटना अब राजनीतिक बहस का विषय बन गई है. विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि गौशालाओं और गौसंरक्षण योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों बनी. कई यूजर्स ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया है.

फिलहाल जांच जारी है, लेकिन जैसलमेर में 500 से ज्यादा गायों की मौत और खुले में पड़े शवों की तस्वीरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि आखिर इस बड़ी त्रासदी के पीछे असली जिम्मेदारी किसकी है.

यह भी पढ़ें- दिल्ली में बकरीद पर सख्ती! इन जानवरों की कुर्बानी हुई बैन, मंत्री कपिल मिश्रा की चेतावनी

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments