Homeधर्मसाल में दो बार क्यों होती है मां सरस्वती की पूजा? अक्टूबर...

साल में दो बार क्यों होती है मां सरस्वती की पूजा? अक्टूबर में कब है पूजा, जानें सही तारीख और महत्व

Saraswati Puja 2026: मां सरस्वती को ज्ञान, विद्या, बुद्धि, वाणी, संगीत और कला की देवी माना जाता है. आमतौर पर सरस्वती पूजा का नाम सुनते ही बसंत पंचमी का ध्यान आता है, लेकिन देश के कई हिस्सों में शारदीय नवरात्र के दौरान भी मां शारदा की विशेष आराधना की जाती है. यही वजह है कि सरस्वती पूजा साल में दो बार मनाए जाने की बात कही जाती है. दोनों पर्वों का उद्देश्य मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करना है, लेकिन उनकी तिथि, परंपरा और पूजा का स्वरूप अलग-अलग है.

अक्टूबर 2026 में सरस्वती पूजा की सही तारीख क्या है?
शारदीय नवरात्र के दौरान होने वाली सरस्वती पूजा को लेकर अक्टूबर में तीन तारीखें महत्वपूर्ण हैं. उपलब्ध पंचांग के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को सरस्वती आह्वान, 17 अक्टूबर को मुख्य सरस्वती पूजा और 19 अक्टूबर को सरस्वती विसर्जन होगा. दक्षिण भारत में आयुध पूजा के अवसर पर सरस्वती आराधना 20 अक्टूबर को की जाएगी.

सरस्वती आह्वान का अर्थ देवी को पूजा के लिए आमंत्रित करना है. इसके अगले दिन मुख्य पूजा की जाती है. अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं और स्थानीय पंचांग के कारण पूजा के स्वरूप और समय में अंतर हो सकता है.

पहली बार: बसंत पंचमी पर क्यों होती है पूजा?
बसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन को विद्या, ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में पूजा आयोजित की जाती है. कई परिवार बच्चों की पढ़ाई शुरू कराने या अक्षर-ज्ञान की शुरुआत के लिए भी इस दिन को शुभ मानते हैं.

बसंत पंचमी का संबंध बसंत ऋतु के आगमन से भी है. इस अवसर पर पीले रंग के वस्त्र पहनने, पीले फूल चढ़ाने और पुस्तकों व वाद्ययंत्रों की पूजा करने की परंपरा कई जगह प्रचलित है. वर्ष 2027 में बसंत पंचमी 11 फरवरी को पड़ेगी.

दूसरी बार: शारदीय नवरात्र में क्यों होती है पूजा?
शारदीय नवरात्र के दौरान विशेष रूप से बंगाल और दक्षिण भारत की कुछ परंपराओं में मां सरस्वती की अलग-अलग दिनों में पूजा की जाती है. बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में सरस्वती आह्वान, प्रधान पूजा और विसर्जन के लिए अलग दिन निर्धारित होते हैं. दक्षिण भारत में आयुध पूजा के अवसर पर किताबों, औजारों, उपकरणों और वाद्ययंत्रों को सम्मान देकर उनकी पूजा की जाती है. इस परंपरा में ज्ञान और कार्य-कौशल के प्रति सम्मान का भाव प्रमुख होता है.

दोनों सरस्वती पूजा में क्या है अंतर?
बसंत पंचमी पर पूजा का मुख्य आधार बसंत ऋतु, विद्या और नई शुरुआत है. वहीं, शारदीय नवरात्र की सरस्वती पूजा देवी उपासना की विस्तृत परंपरा से जुड़ी है, जिसमें आह्वान, मुख्य पूजा और विसर्जन जैसे अलग-अलग चरण हो सकते हैं. दक्षिण भारत में आयुध पूजा के दौरान शिक्षा और ज्ञान के साथ काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों व उपकरणों को भी महत्व दिया जाता है.

इसलिए यह कहना अधिक सही है कि मां सरस्वती की पूजा साल में दो प्रमुख अवसरों पर अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार होती है. अक्टूबर में मुख्य सरस्वती पूजा की तारीख 17 अक्टूबर 2026 है, जबकि 16 अक्टूबर को आह्वान और 20 अक्टूबर को दक्षिण भारत की आयुध पूजा के अवसर पर सरस्वती आराधना की जाएगी.

यह भी पढ़ें- जब सूर्यदेव ने असुर को दिया अपना पुत्र बनने का वरदान, जानिए छठ पूजा से जुड़ी कर्ण की कहानी

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments