Healthy Cooking Methods: स्वस्थ रहने के लिए लोग अक्सर फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त भोजन को अपनी थाली में शामिल करते हैं. लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पौष्टिक खाद्य पदार्थ चुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें किस तरीके से पकाया जाता है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है. गलत तापमान, अधिक तेल, बार-बार गर्म करना या जरूरत से ज्यादा पकाना भोजन के कई आवश्यक पोषक तत्वों को कम कर सकता है. दूसरी ओर, सही कुकिंग तकनीक भोजन की पौष्टिकता बनाए रखने के साथ-साथ उसे अधिक सुपाच्य भी बनाती है. हाल के स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में भी भाप में पकाने, उबालने और कम तेल वाले तरीकों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है.
सिर्फ क्या खा रहे हैं नहीं, कैसे पका रहे हैं यह भी जरूरी
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन C, विटामिन B समूह और कई एंटीऑक्सीडेंट गर्मी के प्रति संवेदनशील होते हैं. यदि सब्जियों को बहुत देर तक तेज आंच पर पकाया जाए या बार-बार गर्म किया जाए तो इनकी मात्रा काफी घट सकती है. यही कारण है कि अब स्वास्थ्य विशेषज्ञ भोजन की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी कुकिंग तकनीक पर भी विशेष जोर दे रहे हैं.
भाप में पकाना और हल्का उबालना सबसे बेहतर विकल्प
विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सब्जियों को भाप में पकाने (Steaming) या हल्का उबालने (Boiling) से अधिकांश पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं. इसके विपरीत डीप फ्राई करने पर भोजन में अतिरिक्त वसा जुड़ जाती है और अधिक तापमान के कारण कुछ हानिकारक यौगिक भी बन सकते हैं. इसलिए रोजमर्रा के भोजन में स्टीम, उबालना, हल्का भूनना या बेकिंग जैसे विकल्प अधिक लाभदायक माने जाते हैं.
बार-बार गर्म किया गया भोजन भी पहुंचा सकता है नुकसान
कई परिवारों में बचा हुआ भोजन बार-बार गर्म करके खाया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे स्वाद ही नहीं, बल्कि पोषण गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है. बार-बार गर्म करने से कुछ विटामिन नष्ट हो जाते हैं और भोजन की बनावट भी बदल जाती है. इसलिए जितनी आवश्यकता हो उतना ही भोजन पकाना बेहतर माना जाता है.
कम तेल का मतलब स्वाद से समझौता नहीं
स्वस्थ खाना बनाने का अर्थ फीका भोजन नहीं है. स्वाद बढ़ाने के लिए हल्दी, अदरक, लहसुन, जीरा, धनिया, दालचीनी, काली मिर्च और अन्य प्राकृतिक मसालों का उपयोग किया जा सकता है. इससे अतिरिक्त नमक और तेल की जरूरत भी कम होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक मसालों का संतुलित उपयोग भोजन को स्वादिष्ट बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो सकता है.
सब्जियों को काटने और धोने का सही तरीका भी जरूरी
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सब्जियों को पहले अच्छी तरह धोना चाहिए और उसके बाद काटना चाहिए. यदि काटने के बाद लंबे समय तक पानी में रखा जाए तो पानी में घुलनशील विटामिन बाहर निकल सकते हैं. इसी प्रकार बहुत छोटे-छोटे टुकड़े करने से भी पोषक तत्वों की हानि बढ़ सकती है.
प्रेशर कुकर और ढ़ककर पकाने के भी फायदे
भारतीय रसोई में प्रेशर कुकर का व्यापक उपयोग होता है. उचित समय तक प्रेशर कुकर में दाल, चना और अन्य अनाज पकाने से ईंधन की बचत होती है और कई मामलों में पोषक तत्व भी बेहतर सुरक्षित रहते हैं. इसी तरह बर्तन को ढ़ककर पकाने से भोजन जल्दी तैयार होता है और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में कम समय रहता है.
तला हुआ भोजन रोजाना खाने से बचें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डीप फ्राई किए गए खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन मोटापा, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मधुमेह जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है. विशेष रूप से बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल में तलना स्वास्थ्य के लिए और अधिक हानिकारक माना जाता है. इसलिए तले हुए खाद्य पदार्थों को केवल कभी-कभार ही खाना बेहतर विकल्प है.
हर आयु वर्ग के लिए अलग हो सकती है कुकिंग जरूरत
बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और खिलाड़ियों की पोषण संबंधी आवश्यकताएं अलग होती हैं. बच्चों और बुजुर्गों के लिए हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन अधिक उपयुक्त होता है, जबकि गर्भवती महिलाओं के भोजन में आयरन, फोलेट और प्रोटीन सुरक्षित रखने वाली कुकिंग तकनीकों को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है.
2026 में बढ़ रहा है ‘स्मार्ट कुकिंग’ का चलन
वर्ष 2026 में पोषण विशेषज्ञ केवल कैलोरी गिनने की बजाय स्मार्ट कुकिंग पर अधिक जोर दे रहे हैं. इसमें कम तेल, नियंत्रित तापमान, मौसमी सब्जियों का उपयोग, कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ और भोजन को ताजा तैयार करके खाने जैसी आदतों को शामिल किया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि सही कुकिंग तकनीक अपनाकर लोग बिना अतिरिक्त खर्च के अपने भोजन की पोषण गुणवत्ता में बड़ा सुधार कर सकते हैं.
स्वस्थ खाना बनाने के आसान उपाय
सब्जियों को अधिक देर तक न पकाएं.
डीप फ्राई की जगह स्टीम, उबालना या बेकिंग अपनाएं.
भोजन को बार-बार गर्म करने से बचें.
कम तेल और कम नमक का उपयोग करें.
ताजा और मौसमी सामग्री को प्राथमिकता दें.
प्राकृतिक मसालों और जड़ी-बूटियों से स्वाद बढ़ाएं.
जरूरत के अनुसार ही भोजन पकाएं, ताकि बार-बार गर्म करने की नौबत न आए.
रसोई से होती है स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत
बेहतर स्वास्थ्य केवल इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हमारी थाली में क्या है, बल्कि इस पर भी निर्भर करता है कि वह भोजन किस प्रकार तैयार किया गया है. सही कुकिंग तकनीक अपनाने से भोजन के विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट बेहतर तरीके से सुरक्षित रहते हैं, जिससे शरीर को अधिक पोषण मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पौष्टिक भोजन के साथ स्वस्थ कुकिंग आदतों को भी दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाए तो मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग और अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
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