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ट्रेनों में फर्जी वेंडर्स की एंट्री पर रोक, TTE और RPF करेंगे तत्काल कार्रवाई

Indian Railways Vendor Rules: भारतीय रेलवे ने ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर अवैध रूप से सामान बेचने वाले वेंडर्स के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है. रेलवे प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति खाद्य पदार्थ, पानी की बोतलें, फल, खिलौने या अन्य सामान बेचने वाले लोगों पर अब तुरंत कार्रवाई की जाएगी. इस अभियान में टिकट परीक्षक (TTE), रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और वाणिज्य विभाग की संयुक्त टीमें शामिल की गई हैं.

रेलवे का मानना है कि अनधिकृत वेंडर्स न केवल यात्रियों से मनमाने दाम वसूलते हैं, बल्कि कई बार खराब गुणवत्ता का सामान बेचकर यात्रियों के स्वास्थ्य को भी खतरे में डालते हैं. इसी वजह से रेलवे ने देशभर में निगरानी और जांच को और अधिक कड़ा कर दिया है.

ट्रेनों में अवैध वेंडिंग पर रेलवे का सख्त रुख
हाल के महीनों में रेलवे को बड़ी संख्या में शिकायतें मिली थीं कि कई ट्रेनों में बिना लाइसेंस वाले लोग खाने-पीने का सामान बेच रहे हैं. कई मामलों में यात्रियों से निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूले जाने की शिकायत भी सामने आई.

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ट्रेनों और रेलवे परिसरों में बिना अनुमति सामान बेचना रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 144 के तहत दंडनीय अपराध है. ऐसे लोगों को पकड़ने पर जुर्माना, गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

TTE को भी दिए गए विशेष निर्देश
रेलवे सूत्रों के अनुसार, अब TTE को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी कोच में संदिग्ध वेंडर दिखाई देता है तो उसकी पहचान की जांच की जाए. यदि वह रेलवे या IRCTC द्वारा अधिकृत नहीं पाया जाता है तो तुरंत RPF को सूचना दी जाएगी.

इसके अलावा ट्रेन स्टाफ को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे यात्रियों को केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही सामान खरीदने के लिए जागरूक करें. रेलवे का मानना है कि यात्रियों की सतर्कता से भी इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है.

RPF चलाएगी विशेष जांच अभियान
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) पहले से ही ट्रेनों और स्टेशनों पर अनधिकृत वेंडर्स, दलालों और अन्य असामाजिक तत्वों के खिलाफ अभियान चलाता रहा है. अब इस अभियान को और व्यापक बनाया जा रहा है.

RPF अधिकारियों को स्टेशन परिसरों, प्लेटफॉर्म और चलती ट्रेनों में औचक जांच करने के निर्देश दिए गए हैं. जहां भी बिना अनुमति सामान बेचने वाले लोग मिलेंगे, उनके खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी. रेलवे सुरक्षा बल की जिम्मेदारियों में अनधिकृत हॉकरों और वेंडर्स के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है.

QR Code से होगी असली वेंडर की पहचान
रेलवे ने अधिकृत वेंडर्स की पहचान सुनिश्चित करने के लिए QR कोड आधारित पहचान पत्र अनिवार्य कर दिए हैं. अब अधिकृत वेंडर्स और कैटरिंग स्टाफ के पास QR कोड युक्त आईडी कार्ड होना जरूरी है.

इस QR कोड को स्कैन करके संबंधित व्यक्ति का नाम, पहचान, मेडिकल फिटनेस और पुलिस सत्यापन जैसी जानकारी देखी जा सकती है. इसका उद्देश्य यात्रियों को यह भरोसा दिलाना है कि वे अधिकृत व्यक्ति से ही सामान खरीद रहे हैं.

हाल में कई मामलों में हुई कार्रवाई
रेलवे के विभिन्न जोनों में हाल के दिनों में अवैध वेंडिंग के खिलाफ कई कार्रवाई की गई हैं. जून 2026 में कोंकण रेलवे ने एक ट्रेन में खराब फल बेच रहे एक अनधिकृत वेंडर को पकड़ा. जांच में वह बिना वैध अनुमति के सामान बेचता पाया गया, जिसके बाद उस पर जुर्माना लगाया गया और आगे की कार्रवाई के लिए RPF को सौंप दिया गया. इसके बाद कोंकण रेलवे ने 15 दिन का विशेष अभियान भी शुरू किया, जिसमें ट्रेनों और स्टेशनों पर व्यापक जांच की जा रही है.

यात्रियों को क्या करना चाहिए?
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत वेंडर्स से ही सामान खरीदें. यदि कोई व्यक्ति बिना पहचान पत्र या बिना यूनिफॉर्म के सामान बेचता दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत TTE, रेलवे हेल्पलाइन या RPF को दें. यात्रियों को खरीदारी से पहले QR कोड आधारित पहचान पत्र देखने की भी सलाह दी गई है. इससे नकली विक्रेताओं की पहचान करना आसान होगा.

क्या सभी वेंडर्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है?
सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि रेलवे ने ट्रेनों में सामान बेचने वाले सभी वेंडर्स पर रोक लगा दी है. यह दावा पूरी तरह सही नहीं है. रेलवे ने केवल अनधिकृत और बिना लाइसेंस वाले वेंडर्स के खिलाफ कार्रवाई तेज की है. अधिकृत कैटरिंग स्टाफ और लाइसेंस प्राप्त विक्रेता पहले की तरह अपनी सेवाएं जारी रख सकते हैं. रेलवे ने उनकी पहचान के लिए QR कोड आधारित व्यवस्था लागू की है.

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर फोकस
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी का रोजगार छीनना नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा, खाद्य गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. रेलवे चाहता है कि यात्रियों को उचित मूल्य पर सुरक्षित और स्वच्छ खाद्य सामग्री उपलब्ध हो.

विशेषज्ञों का मानना है कि QR कोड आधारित पहचान और RPF-TTE की संयुक्त निगरानी से ट्रेनों में अवैध वेंडिंग की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. आने वाले दिनों में रेलवे इस अभियान को और व्यापक बना सकता है, जिससे यात्रियों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा अनुभव मिल सकेगा.

यह भी पढ़ें- क्या ट्रेन में शराब की बोतल ले जा सकते हैं? जानिए रेलवे के नियम

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