Homeपॉलिटिक्सTMC में महाभूकंप! 20 सांसदों की बगावत, NDA में जाने की तैयारी?

TMC में महाभूकंप! 20 सांसदों की बगावत, NDA में जाने की तैयारी?

TMC Split 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उथल-पुथल का दौर जारी है. विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद अब ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC एक नए संकट का सामना कर रही है. पार्टी के भीतर सांसदों की बगावत की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है. सूत्रों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, करीब 20 सांसद अलग संसदीय गुट बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं और उनके NDA के शीर्ष नेताओं से संपर्क में होने की चर्चाएं भी तेज हैं.

दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल
रविवार और सोमवार को दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गईं. खबर है कि कई असंतुष्ट सांसद राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे और उन्होंने आगे की रणनीति पर चर्चा की. कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता मांग सकते हैं. हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि सांसदों का बड़ा समूह अलग राह चुनता है तो यह TMC के लिए विधानसभा चुनावी हार के बाद दूसरा सबसे बड़ा झटका होगा.

20 सांसदों के अलग गुट की चर्चा क्यों?
पिछले कुछ दिनों से TMC के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. पहले बड़ी संख्या में विधायकों के अलग होने की घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व को मुश्किल में डाला. अब वही असंतोष संसद तक पहुंचता दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ सांसद पार्टी की मौजूदा कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर नाराज बताए जा रहे हैं. सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि बागी सांसद अलग संसदीय पहचान बनाकर भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को तलाशना चाहते हैं.

NDA में जाने की अटकलें
राजनीतिक चर्चा का सबसे बड़ा विषय यह है कि यदि अलग गुट बनता है तो उसका अगला कदम क्या होगा. कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बागी सांसद NDA के नेताओं के संपर्क में हैं. हालांकि न तो बागी सांसदों ने और न ही NDA नेतृत्व ने इस संबंध में कोई औपचारिक बयान जारी किया है. इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है. वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी के बड़ी संख्या में सांसद अलग राह चुनते हैं, तो संसद में विपक्ष की ताकत कमजोर पड़ सकती है. इससे न केवल टीएमसी की राजनीतिक हैसियत प्रभावित होगी, बल्कि विपक्षी गठबंधन की एकजुटता और प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.

बगावत के बीच पार्टी को एक और बड़ा नुकसान
आज ही के दिन (8 जून 2026 को) टीएमसी को एक और बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने न केवल तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, बल्कि राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी. लंबे समय से पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे रॉय का यह कदम ऐसे समय आया है, जब टीएमसी पहले से ही आंतरिक असंतोष और संभावित टूट की अटकलों से जूझ रही है. उनके इस्तीफे ने यह संकेत और मजबूत कर दिया है कि पार्टी के भीतर संकट गहराता जा रहा है और ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं.

ममता बनर्जी खुद मैदान में उतरीं
बढ़ते संकट के बीच ममता बनर्जी स्वयं दिल्ली पहुंचीं. उनके साथ कुछ वरिष्ठ सांसद भी मौजूद रहे. बताया जा रहा है कि उनका मुख्य उद्देश्य सांसदों को एकजुट रखना और संभावित टूट को रोकना है. इसी कारण पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों से संपर्क बनाए हुए है. इसके अलावा, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी पहले ही दिल्ली पहुंच गए थे, ताकि हालात का आकलन किया जा सके और असंतुष्ट नेताओं से बातचीत की जा सके.

INDIA गठबंधन की बैठक के बीच बढ़ा दबाव
दिल्ली में यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी गठबंधन INDIA की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई. इस बैठक में ममता बनर्जी समेत कई बड़े विपक्षी नेता शामिल हुए. ऐसे समय TMC में संभावित टूट की खबरों ने विपक्षी एकता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि TMC का संसदीय दल कमजोर होता है तो इसका असर INDIA गठबंधन की सामूहिक रणनीति पर भी पड़ सकता है, क्योंकि संसद में TMC विपक्ष की प्रमुख ताकतों में गिनी जाती रही है.

क्या कहता है दल-बदल कानून?
किसी भी संसदीय दल में औपचारिक विभाजन को मान्यता मिलने के लिए पर्याप्त संख्या का समर्थन जरूरी होता है. इसी वजह से TMC नेतृत्व बागी सांसदों को पार्टी से निष्कासित करने के बजाय बातचीत के जरिए उन्हें साथ बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.

आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 20 सांसद वास्तव में अलग गुट बनाएंगे या यह दबाव की राजनीति का हिस्सा है. अभी तक कोई आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही किसी सांसद ने खुलकर पार्टी छोड़ने की घोषणा की है. लेकिन दिल्ली में बढ़ती बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों ने यह संकेत जरूर दिया है कि TMC का संकट अभी खत्म नहीं हुआ है.

यदि आने वाले दिनों में अलग गुट के गठन की औपचारिक घोषणा होती है, तो यह TMC के इतिहास की सबसे बड़ी संसदीय टूटों में से एक साबित हो सकती है. वहीं अगर ममता बनर्जी असंतुष्ट सांसदों को मनाने में सफल रहती हैं, तो पार्टी फिलहाल इस संकट से उबर सकती है. अगले कुछ दिन पश्चिम बंगाल और राष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

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