Bankipur By Election 2026: बिहार के चर्चित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान से ठीक पहले सियासी विवाद और तेज हो गया है. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के खिलाफ शास्त्रीनगर थाने में मामला दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चुनावी अपील वाले वीडियो को कथित तौर पर फर्जी और AI से तैयार बताया जाने के बाद हुई. इस घटनाक्रम ने मतदान से एक दिन पहले चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है.
क्या है पूरा मामला?
प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक वीडियो वास्तविक नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है. उनके इस बयान के बाद जदयू ने कड़ा विरोध जताया और आरोप लगाया कि मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए बिना किसी प्रमाण के झूठे दावे किए गए हैं.
जदयू नेता की शिकायत पर दर्ज हुआ केस
जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने शास्त्रीनगर थाने में लिखित शिकायत देकर प्रशांत किशोर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. शिकायत में आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री के वीडियो को फर्जी बताकर उनकी छवि धूमिल करने और चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है.
पुलिस करेगी वीडियो और बयानों की जांच
पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित वीडियो की जांच करेगी. जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि प्रशांत किशोर के दावों के समर्थन में कोई तकनीकी या डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं. वहीं, वीडियो की प्रामाणिकता और उससे जुड़े डिजिटल पहलुओं की भी पड़ताल की जा सकती है. फिलहाल पुलिस ने किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है.
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी तल्खी
बांकीपुर उपचुनाव पहले से ही बिहार की राजनीति का हाई-प्रोफाइल मुकाबला माना जा रहा है. ऐसे समय में दर्ज हुए इस मामले ने चुनावी बहस को नया मोड़ दे दिया है. भाजपा, जदयू, राजद और जन सुराज के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है, जबकि निर्वाचन आयोग की निगरानी में मतदान की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं.
प्रशांत किशोर का पक्ष
प्रशांत किशोर पहले ही सार्वजनिक रूप से वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठा चुके हैं और अपने दावे पर कायम हैं. दूसरी ओर, जदयू ने इसे पूरी तरह वास्तविक वीडियो बताते हुए कहा है कि विपक्ष चुनाव से पहले भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है. इस मामले में अंतिम सत्य जांच और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगा.
अब जांच पर टिकी सबकी नजर
अब सभी की नजर पुलिस जांच और चुनावी प्रक्रिया पर रहेगी. यदि जांच में किसी पक्ष के दावों की पुष्टि होती है तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और डिजिटल चुनाव प्रचार, दोनों के लिए चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है.
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