Mumbai Police Negligence: मुंबई में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की संवेदनशीलता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 73 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक शरद कदम कार चला रहे थे, तभी उन्हें अचानक स्ट्रोक आया. इसी दौरान उनकी कार एक मामूली दुर्घटना का शिकार हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जानकारी के आधार पर पुलिस ने उन्हें नशे की हालत में वाहन चलाने के शक में अस्पताल ले जाने के बजाय थाने ले जाकर बैठा दिया.
पांच घंटे थाने में रहे, निकल गया ‘गोल्डन ऑवर’
रिपोर्ट के अनुसार, बुजुर्ग को लगभग पांच घंटे तक मुंबई के वर्सोवा पुलिस थाने में रखा गया. स्ट्रोक के मामलों में शुरुआती “गोल्डन ऑवर” बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान समय पर इलाज मिलने से मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है. लेकिन इस देरी के कारण उनकी स्थिति गंभीर हो गई और बाद में उन्हें अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा. चिकित्सकों के अनुसार, देरी के कारण उनके शरीर के एक हिस्से में लकवे (पैरालिसिस) के लक्षण विकसित हो गए.
अस्पताल पहुंचने पर सामने आई असली वजह
जब शरद कदम की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब चिकित्सकीय जांच में स्पष्ट हुआ कि वे शराब के नशे में नहीं थे, बल्कि उन्हें स्ट्रोक आया था. डॉक्टरों ने बताया कि स्ट्रोक के कई लक्षण, जैसे लड़खड़ाकर चलना, स्पष्ट रूप से बात न कर पाना या भ्रम की स्थिति, कई बार नशे जैसे प्रतीत हो सकते हैं. ऐसे मामलों में तत्काल चिकित्सकीय जांच बेहद जरूरी होती है.
पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
घटना के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की शारीरिक स्थिति सामान्य नहीं दिख रही हो, तो उसे पहले अस्पताल ले जाकर चिकित्सकीय परीक्षण कराना चाहिए. केवल संदेह के आधार पर थाने में बैठाकर रखना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है, खासकर जब मामला स्ट्रोक या अन्य मेडिकल इमरजेंसी का हो.
परिवार ने जताई नाराजगी
शरद कदम के परिवार ने आरोप लगाया कि यदि समय पर उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया जाता तो उनकी स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उनकी बिगड़ती हालत को मेडिकल इमरजेंसी के बजाय शराब पीकर वाहन चलाने का मामला मान लिया, जिससे इलाज में देरी हुई.
मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह
न्यूरोलॉजिस्ट बताते हैं कि स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर FAST (Face, Arm, Speech, Time) नियम को ध्यान में रखना चाहिए. चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा होना, एक हाथ में कमजोरी आना, बोलने में कठिनाई होना और ऐसे लक्षण दिखते ही बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचना मरीज की जान बचाने और स्थायी नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि सड़क पर किसी भी व्यक्ति की असामान्य शारीरिक स्थिति को केवल नशे से जोड़कर नहीं देखना चाहिए. समय पर चिकित्सा सहायता ही कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होती है.
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