Vande Mataram Bill 2026: संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय प्रतीकों को कानूनी संरक्षण देने से जुड़े ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को गुरुवार को लोकसभा ने भी ध्वनिमत से पारित कर दिया. इससे एक दिन पहले यह विधेयक राज्यसभा से भी मंजूर हो चुका था. लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने जमकर विरोध किया, नारेबाजी की और कई दलों ने सदन से वॉकआउट भी किया. विपक्ष का आरोप था कि सरकार गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस विधेयक को प्राथमिकता दे रही है, जबकि सरकार ने इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण कानून बताया.
क्या है ‘वंदे मातरम्’ बिल?
यह संशोधन विधेयक राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संबंधी कानून में बदलाव करता है. इसके तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन में जानबूझकर बाधा डालना, उसका अपमान करना या सार्वजनिक रूप से उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है. सरकार का कहना है कि राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रगीत को भी समान कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए.
दोषी पाए जाने पर क्या होगी सजा?
विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन में व्यवधान उत्पन्न करता है या उसका अपमान करता है और अदालत उसे दोषी ठहराती है, तो उसे तीन वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि अंतिम दंड का फैसला न्यायालय मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर करेगा.
विपक्ष ने क्यों किया विरोध?
लोकसभा में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने विधेयक पर आपत्ति जताई. विपक्ष का कहना था कि देश में शिक्षा, बेरोजगारी और अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता है, जबकि सरकार राष्ट्रवाद से जुड़े विधेयकों को प्राथमिकता दे रही है. विपक्षी सांसदों ने सदन में नारेबाजी की और कई दलों ने मतदान से पहले वॉकआउट भी किया. इसके बावजूद सरकार ने ध्वनिमत से विधेयक पारित करा लिया.
सरकार का पक्ष
सरकार ने सदन में कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान रहा है और करोड़ों देशवासियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है. सरकार के अनुसार, राष्ट्रगीत के सम्मान की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान आवश्यक हैं, ताकि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान सुनिश्चित किया जा सके.
अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार
लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद इसे राजपत्र (गजट) में अधिसूचित किया जाएगा और तभी यह कानून के रूप में लागू होगा. सरकार अधिसूचना जारी कर इसके प्रभावी होने की तारीख भी घोषित करेगी.
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