Homeनेशनलडिलीवरी बॉय की हरकत से दहली युवती, उठे बैकग्राउंड चेक और सुरक्षा...

डिलीवरी बॉय की हरकत से दहली युवती, उठे बैकग्राउंड चेक और सुरक्षा पर बड़े सवाल

Delivery Boy Harassment: ऑनलाइन ग्रॉसरी और क्विक-कॉमर्स सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ग्राहकों की सुरक्षा एक बार फिर चर्चा में है. 31 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक घटना में बेंगलुरु की एक युवती ने आरोप लगाया कि जेप्टो के एक डिलीवरी पार्टनर ने पानी मांगने के बाद उसके घर के अंदर आने की लगातार जिद की. युवती का दावा है कि उसने कई बार मना किया, लेकिन डिलीवरी एजेंट दरवाजा खटखटाता रहा, जिससे वह डर गई. यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने डिलीवरी कंपनियों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए.

पानी के बहाने घर में आने की कोशिश का आरोप
युवती के मुताबिक, डिलीवरी एजेंट ने पहले पीने का पानी मांगा. उसने पानी की बोतल देकर उसे बाहर ही पीने के लिए कहा, लेकिन एजेंट कथित तौर पर घर के अंदर आने की अनुमति मांगता रहा. युवती का कहना है कि उसने बार-बार मना किया, फिर भी एजेंट कुछ मिनट अंदर बैठने की बात कहता रहा. बाद में उसने घंटी बजाई और दरवाजा भी खटखटाया. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.

जेप्टो ने क्या कार्रवाई की?
मामला सामने आने के बाद जेप्टो ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह इस घटना को गंभीरता से ले रही है. कंपनी ने संबंधित डिलीवरी पार्टनर की आईडी तत्काल प्रभाव से निष्क्रिय (Terminate) कर दी और आंतरिक जांच शुरू करने की जानकारी दी. कंपनी ने ग्राहक से ऑर्डर विवरण भी मांगा, ताकि मामले की विस्तृत जांच की जा सके.

क्या Zepto और Blinkit अपने डिलीवरी पार्टनर का बैकग्राउंड चेक करते हैं?
भारत की प्रमुख क्विक-कॉमर्स कंपनियां जैसे Zepto और Blinkit अपने डिलीवरी पार्टनर के ऑनबोर्डिंग के दौरान पहचान संबंधी दस्तावेज (KYC) जैसे आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज लेती हैं. कई मामलों में थर्ड-पार्टी एजेंसियों के माध्यम से पहचान सत्यापन और दस्तावेजों की जांच भी कराई जाती है.

हालांकि, हर डिलीवरी पार्टनर का पुलिस वेरिफिकेशन या क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक कानूनी रूप से अनिवार्य है, ऐसा कोई सार्वभौमिक केंद्रीय कानून फिलहाल लागू नहीं है. कंपनियां अपनी आंतरिक नीतियों और जोखिम प्रबंधन के आधार पर अलग-अलग स्तर की जांच प्रक्रिया अपनाती हैं. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि प्रत्येक डिलीवरी एजेंट का पुलिस रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से जांचा ही जाता है.

क्या कहते हैं मौजूदा नियम?
भारत में गिग वर्कर्स के लिए अभी ऐसा कोई विशेष केंद्रीय कानून नहीं है जो सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को हर डिलीवरी पार्टनर का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराने का आदेश देता हो. हालांकि, कंपनियों पर अपने कर्मचारियों और डिलीवरी पार्टनर की पहचान सत्यापित करने, ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई करने की जिम्मेदारी होती है. गंभीर मामलों में पुलिस जांच और कंपनी की आंतरिक जांच समानांतर रूप से चल सकती है.

सोशल मीडिया पर उठी सख्त नियमों की मांग
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने मांग की कि क्विक-कॉमर्स कंपनियों को केवल दस्तावेज सत्यापन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि डिलीवरी पार्टनर का क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक, समय-समय पर वेरिफिकेशन और व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण भी अनिवार्य करना चाहिए. कई यूजर्स ने महिलाओं और अकेले रहने वाले ग्राहकों की सुरक्षा के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू करने की जरूरत बताई.

ग्राहकों के लिए क्या सावधानी जरूरी?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डिलीवरी लेते समय यदि संभव हो तो दरवाजा पूरी तरह न खोलें, किसी अनजान व्यक्ति को घर के अंदर प्रवेश न दें और किसी भी संदिग्ध व्यवहार की स्थिति में तुरंत कंपनी के हेल्प सेंटर व स्थानीय पुलिस को सूचना दें. ग्राहक सुरक्षा केवल कंपनी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.

यह भी पढ़ें- खून से सनी वर्दी, नम आंखें और न्याय की मांग… जंतर-मंतर हिंसा पर छलका घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का दर्द

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments