Ankit Sharma Murder Case: दिल्ली के 2020 उत्तर-पूर्वी दंगा मामले से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार (31 जुलाई 2026) को बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. इससे पहले अभियोजन पक्ष ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” बताते हुए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
किन दोषियों को मिली सजा?
अदालत ने ताहिर हुसैन के अलावा जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी उम्रकैद की सजा सुनाई. इन सभी को इसी महीने अदालत ने हत्या, गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा बनने, अपहरण और दंगों से जुड़े गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया था. हालांकि मुकदमे में शामिल कुछ अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण पहले ही बरी कर दिया गया था.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है. 26 वर्षीय आईबी अधिकारी अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को लापता हो गए थे. अगले दिन उनका शव एक नाले से बरामद हुआ था. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया था. इसके बाद पुलिस ने हत्या और दंगों से जुड़े विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी.
अदालत ने क्या माना?
दोषसिद्धि के दौरान अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह साबित किया कि दोषी हिंसक भीड़ का हिस्सा थे. अदालत के अनुसार, ऐसे हालात में भीड़ का सदस्य होने वाला व्यक्ति यह जानता है कि उसकी कार्रवाई से किसी की जान जा सकती है. इसी आधार पर अदालत ने पांचों को हत्या सहित विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया था.
अभियोजन ने मांगी थी फांसी
सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से कहा था कि अंकित शर्मा की हत्या बेहद क्रूर और सुनियोजित तरीके से की गई थी, इसलिए यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” की श्रेणी में आता है और दोषियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए. बचाव पक्ष ने इसका विरोध करते हुए उम्रकैद की मांग की थी. अंततः अदालत ने सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई.
फैसले का महत्व
31 जुलाई 2026 को आया यह फैसला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों में गिना जा रहा है. लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में दोषियों की सजा तय कर दी है. हालांकि, भारतीय न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोषियों के पास उच्च अदालत में इस फैसले को चुनौती देने का कानूनी अधिकार उपलब्ध रहेगा.
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