Muslim Polygamy Case: मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह (एक से अधिक विवाह) की प्रथा को लेकर देश में एक बार फिर बड़ी कानूनी बहस शुरू हो गई है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर दायर एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया और उसका जवाब मांगा. हालांकि अदालत ने फिलहाल बहुविवाह पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई है और न ही कोई अंतिम फैसला सुनाया है. फिलहाल मामला विचाराधीन है और केंद्र सरकार से विस्तृत पक्ष रखने को कहा गया है.
याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह की प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है. साथ ही अदालत से आग्रह किया गया है कि सभी धर्मों पर समान रूप से द्विविवाह (Bigamy) से जुड़े कानून लागू किए जाएं. याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है और मुस्लिम महिलाओं को अन्य महिलाओं के मुकाबले समान कानूनी सुरक्षा नहीं मिलती.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर संवैधानिक प्रश्न मानते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. अदालत ने इस स्तर पर किसी भी पक्ष की दलीलों पर अंतिम टिप्पणी करने से परहेज किया और कहा कि पहले केंद्र सरकार का पक्ष जानना आवश्यक है. इसके बाद ही आगे की सुनवाई होगी.
संविधान और व्यक्तिगत कानूनों पर बहस
यह मामला केवल बहुविवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), अनुच्छेद 15 (भेदभाव निषेध) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार) से भी जुड़ा हुआ है. याचिका में दावा किया गया है कि बहुविवाह की अनुमति महिलाओं के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है. वहीं दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जाता है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय है, इसलिए इस पर कोई भी निर्णय संवैधानिक और धार्मिक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए.
क्या अभी मुस्लिमों में बहुविवाह पर प्रतिबंध लग गया है?
यह स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी बहुविवाह पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है. अदालत ने केवल केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. जब तक अंतिम फैसला नहीं आता या संसद इस विषय पर कोई नया कानून नहीं बनाती, तब तक वर्तमान कानूनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
सरकार के जवाब के बाद तय होगी मामले की अगली दिशा
अब केंद्र सरकार निर्धारित समय में अपना जवाब दाखिल करेगी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ता और अन्य पक्षों की दलीलें सुनेगा. सुनवाई के दौरान यह तय किया जाएगा कि यह मामला संविधान के अनुरूप किस प्रकार आगे बढ़ेगा और क्या इस विषय में किसी विधायी या न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है. फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और देशभर की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं.
यह भी पढ़ें- खून से सनी वर्दी, नम आंखें और न्याय की मांग… जंतर-मंतर हिंसा पर छलका घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का दर्द




